: आहार के नियम भारतीय 12 महीनों के अनुसार
Fri, May 31, 2024
आहार के नियम भारतीय 12 महीनों अनुसार....
.
👉
चैत्र ( मार्च-अप्रैल
) – इस महीने में गुड का सेवन करे क्योकि गुड आपके रक्त संचार और रक्त को शुद्ध करता है एवं कई बीमारियों से भी बचाता है। चैत्र के महीने में नित्य नीम की 4 – 5 कोमल पतियों का उपयोग भी करना चाहिए इससे आप इस महीने के सभी दोषों से बच सकते है। नीम की पतियों को चबाने से शरीर में स्थित दोष शरीर से हटते है।
👉
वैशाख (अप्रैल – मई)-
वैशाख महीने में गर्मी की शुरुआत हो जाती है। बेल पत्र का इस्तेमाल इस महीने में अवश्य करना चाहिए जो आपको स्वस्थ रखेगा। वैशाख के महीने में तेल का उपयोग बिल्कुल न करे क्योकि इससे आपका शरीर अस्वस्थ हो सकता है।
👉
ज्येष्ठ (मई-जून)
– भारत में इस महीने में सबसे अधिक गर्मी होती है। ज्येष्ठ के महीने में दोपहर में सोना स्वास्थ्य वर्द्धक होता है , ठंडी छाछ , लस्सी, ज्यूस और अधिक से अधिक पानी का सेवन करें। बासी खाना, गरिष्ठ भोजन एवं गर्म चीजो का सेवन न करे। इनके प्रयोग से आपका शरीर रोग ग्रस्त हो सकता है।
👉
अषाढ़ (जून-जुलाई) –
आषाढ़ के महीने में आम , पुराने गेंहू, सत्तु , जौ, भात, खीर, ठन्डे पदार्थ , ककड़ी, पलवल, करेला, बथुआ आदि का उपयोग करे व आषाढ़ के महीने में भी गर्म प्रकृति की चीजों का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
👉
श्रावण (जूलाई-अगस्त) –
श्रावण के महीने में हरड का इस्तेमाल करना चाहिए। श्रावण में हरी सब्जियों का त्याग करे एव दूध का इस्तेमाल भी कम करे। भोजन की मात्रा भी कम ले – पुराने चावल, पुराने गेंहू, खिचड़ी, दही एवं हलके सुपाच्य भोजन को अपनाएं।
👉
भाद्रपद (अगस्त-सितम्बर)
– इस महीने में हलके सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल कर वर्षा का मौसम् होने के कारण आपकी जठराग्नि भी मंद होती है इसलिए भोजन सुपाच्य ग्रहण करे। इस महीने में चिता औषधि का सेवन करना चाहिए।
👉
आश्विन (सितम्बर-अक्टूबर
) – इस महीने में दूध , घी, गुड़ , नारियल, मुन्नका, गोभी आदि का सेवन कर सकते है। ये गरिष्ठ भोजन है लेकिन फिर भी इस महीने में पच जाते है क्योकि इस महीने में हमारी जठराग्नि तेज होती है।
👉
कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर)
– कार्तिक महीने में गरम दूध, गुड, घी, शक्कर, मुली आदि का उपयोग करे। ठंडे पेय पदार्थो का प्रयोग छोड़ दे। छाछ, लस्सी, ठंडा दही, ठंडा फ्रूट ज्यूस आदि का सेवन न करे , इनसे आपके स्वास्थ्य को हानि हो सकती है।
👉
अगहन (नवम्बर-दिसम्बर)
– इस महीने में ठंडी और अधिक गरम वस्तुओ का प्रयोग न करे।
👉
पौष (दिसम्बर-जनवरी
) – इस ऋतू में दूध, खोया एवं खोये से बने पदार्थ, गौंद के लाडू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला आदि का प्रयोग करे, ये पदार्थ आपके शरीर को स्वास्थ्य देंगे। ठन्डे पदार्थ, पुराना अन्न, मोठ, कटु और रुक्ष भोजन का उपयोग न करे।
👉
माघ (जनवरी-फ़रवरी
) – इस महीने में भी आप गरम और गरिष्ठ भोजन का इस्तेमाल कर सकते है। घी, नए अन्न, गौंद के लड्डू आदि का प्रयोग कर सकते है।
फाल्गुन (फरवरी-मार्च)
– इस महीने में गुड का उपयोग करे। सुबह के समय योग एवं स्नान का नियम बना ले। चने का उपयोग न करे।
: लू लगने से मृत्यु क्यू होती हैं ?
Mon, May 27, 2024
*🌤लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?*
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है?
👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है।
👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है।
👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है। (बंद कर देता है )
👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है।
👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है।
👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं।
👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है।
👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है।
👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए।
Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।
कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।
तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा।
यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा।
(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है)।
कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें।
किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें। किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें।
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें।
फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।
हीट वेव कोई मजाक नही है ।
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।
शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।
*
: 35 पार होने पर ऐसे करे अपनी त्वचा की देखभाल
Sat, May 25, 2024
इसे*
35 पार मे हम ऐसे करें अपनी त्वचा की देखभाल*
*
1. थकान और बढ़ती उम्र की झलक आंखों पर सबसे पहले दिखने लगती है। ऐसे में आप आंखों को ज्यादा थकने से बचाएं, उन्हें काम के बीच में आराम दें और सोने से पहले आंखों का मेकअप हटाना कतई न भूलें।
2. किशोरावस्था में मुंहासे होना अलग बात है, लेकिन 35 की उम्र के बाद भी मुंहासे हो रहे है तो इसे गंभीरता से ले। क्योंकि इस उम्र में ये त्वचा की गहराई से आते हैं, ऐसे में पुराने प्रोडक्ट्स लगाने से काम नहीं होगा। आप ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें जिसमें सल्फर शामिल हों और जो स्किन को ज्यादा मॉइश्चराइज करें। अगर अब तक आप विटामिन सी जैल युज करती हैं तो 35 की उम्र बाद विटामिन सी सीरम का इस्तेमाल करें।
3. अगर अभी तक आप वजन को लेकर सीरियस नहीं रही हो, तो 35 की उम्र बाद अपनी बॉडी वेट पर विशेष ध्यान दे, क्योंकि इस उम्र में शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल कम होने लगता है, जिसकी वजह से शरीर में फैट का पुनर्विभाजन होता है और वजन में भी बदलाव आता है। इसके अलावा इस उम्र में त्वचा में ढीलापन भी आने लगता है।
4. इस उम्र में अपनी सेहत का खास ख्याल रखें और वजन ज्यादा न बढ़ने दें, इसके लिए रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जरूर करें।
5. 35 की उम्र में सन डैमेज, झुर्रियों, सन स्पॉट्स आदि से बचाव पहले से ज्यादा जरूरी हो जाता है। इसलिए सनस्क्रीन को भूलकर भी लगाना न भूलें। इसे हमेशा बाहर जाते समय लगाएं, इससे त्वचा सुरक्षित रहेगी।
*नोट, जानकारी में किसी प्रकार की संशय लगने पर आप उपयोग से पूर्व अन्य स्रोतों से या राष्ट्रिय प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र से सत्यापन जरूर करें।