: प्राकृतिक तरीके से हमारे शरीर और ब्लड को डिटॉक्स करें
Tue, May 7, 2024
हमारे शरीर और ब्लड को डी टोक्स करते हे ये फल फ्रूट
▪️हरी पत्तेदार सब्जियां ....
हरी पत्तेदार सब्जियां पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं। इनके सेवन से कई बीमारियां शरीर से दूर रहती हैं। लेट्युस , पालक और सरसों, मेथी आदि नेचुरली ब्लड को साफ करते हैं। ये सब्जियां लिवर में एंजाइम को बढ़ाती हैं जिससे ब्लड डिटॉक्सीफिकेशन प्रोसेस तेज होता है।
▪️खट्टे-मीठे फल....
नींबू, संतरा, मौसम्बी, सेब, आलूबुखारा, नाशपाती , अमरूद और पपीते जैसे फल में पेक्टिन फाइबर (Pectin fibre) और विटामिन सी भरपूर होता है जो खून को साफ रखने में उपयोगी होता है।
▪️पानी ....
पानी सबसे कॉमन और नेचुरल ब्लड प्यूरीफायर है। किडनी, यूरिन के माध्यम से टॉक्सिन्स को बाहर निकालती है और इस प्रक्रिया को स्टिम्युलेट करती है। पानी शरीर के सभी हानिकारक रसायनों और विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालता है और सभी अंगों को अच्छी तरह काम करने में मदद करता है।
▪️बेरीज ....
ब्लू और रेड बेरीज के अलावा स्ट्रॉबेरी, ब्लैकबेरी और क्रैनबेरी को खाने से भी नेचुरल ब्लड प्यूरिफाई होता है।
▪️गुड़...
गुड़ भी नेचुरल प्यूरिफायर है। इसका सेवन कब्ज रोकता है और शरीर से अपशिष्ट को बाहर निकालता है।
▪️हल्दी....
एंटीसेप्टिक हल्दी खून को भी साफ करती है। ये लिवर फंक्शन को बढ़ावा देने में मदद करती है। हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कम्पाउंड शरीर की अधिकांश समस्याओं के लिए लड़ने वाला माना जाता है।
नोट, जानकारी में किसी प्रकार की संशय लगने पर आप राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र या अन्य स्रोतों से उपयोग से पूर्व सत्यापन जरूर करें।
: यूरिक एसिड
Mon, May 6, 2024
--------: यूरिक एसिड :---------
क्या , आपके शरीर विशेषकर हड्डियों और हड्डियों के जोड़ों में अक्सर दर्द रहता है, जिससे आप न बैठ पाते हैं और न ही चैन से सो पाते हैं? क्योंकि , यह हड्डियों में यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण है। इसका समय रहते चिकित्सा न करवाने से , आपका शरीर दर्द का घर बन सकता है। यूरिक एसिड बढने के शिकार, अक्सर 25 से 30 वर्ष की उम्र के बाद अधिक होते है, जिसकी वजह से उन्हें गठिया और हड्डियों में दर्द व सूजन की शिकायत होने लगती है।
आधुनिक जीवन पद्धति , अनहेल्दी खान-पान, बेतरतीब दिनचर्या के चलते भोजन के पाचन क्रिया में समस्या पैदा होने लगती है और ग्लूकोज़ प्रोटीन से सीधे uric acid में बदलने लगता है। uric acid एक तरह से हड्डियों के जोड़ों वाली जगह पर जमने वाली एसिड क्रिस्टल है। शरीर में बहुत ज्यादा मात्रा में यूरिया का निर्माण होता है और अतिरिक्त यूरिया मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकलती है। यूरिया के साथ अनावश्यक यूरिक एसिड भी, शरीर से बाहर निकल जाता है। लेकिन, जब किसी कारण से , किडनी की छानने की क्षमता कम हो जाती है, तब अतिरिक्त यूरिया शरीर में रह जाती है और यूरिक एसिड में बदलने लगती है। यूरिक एसिड बाद में हड्डियों में जाकर जमा होने लगता है ।जिससे व्यक्ति के शरीर, विशेषकर हड्डियों में दर्द रहने लगता है |
कारण --------
* ज्यादा प्रोटीन और चीनी के सेवन से, यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
* कई लोगों मे वंशानुगत कारणों को भी, यूरिक एसिड बढ़ जाता है।
* किडनी द्वारा सीरम यूरिक एसिड कम पैदा करने की कारण से भी , इसका स्तर रक्त मे बढ़ जाता है। किसी कारण से किडनी की छानने की झमता कम हो जाती है तो यूरिया uric acid में बदल जाता है, जो हड्डियों के बीच में जमा हो जाता है।
* रक्त में आयरन की अधिकता भी, यह समस्या हो सकती है । इसलिए, इसे आप रक्तदान से नियंत्रण कर सकते है।
* मूत्र बढ़ाने वाली औषधीय या डायबिटीज़ की औषधीय के प्रयोग से भी, यूरिक ऐसिड बढ़ सकता है।
* जो लोग रेड मीट, सी फूड, रेड वाइन, दाल, राज़मा, मशरूम, गोभी, टमाटर, पालक, मटर, पनीर, भिंडी, अरबी, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, चावल वगैरह का ज्यादा मात्रा में सेवन करते हैं, उनके शरीर में uric acid बढ़ जाता है |
* शराब के सेवन से या बियर पीने से |
* ब्लड प्रेशर की औषधीय, पेन किलर्स और कैंसर रोधी औषधीय आदि के सेवन से |
यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण -------
* पैर और हाथों की उंगलियों अंगूठों के जोड़ो में हल्की हल्की चुभन जैसा दर्द, पैरों की उंगलियों, टखनों और घुटनों में दर्द, कमर, गर्दन में दर्द |
* पैरों-जोड़ों में दर्द, एड़ियों में दर्द, गांठों में सूजन
ज्यादा देर बैठने पर या उठने में पैरों एड़ियों में असहनीय दर्द।
* शुगर लेवल बढ़ना।
* सोते समय पैर में जकड़न।
* चलने में समस्या।
* घुटनों में दर्द।
* पैर के अंगूठे में खुजली।
* यूरिक एसिड का परीक्षण रक्त की जांच द्वारा होती है।
* महिलाओं में, यूरिक एसिड का सामान्य लेवल 2.4-6.0 mg/dL और पुरुषों में 3.4-7.0 mg/dL
कंट्रोल करना आवश्यक है।
नोट, जानकारी में किसी प्रकार की संशय लगने पर आप उपयोग से पूर्व राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र से या अन्य स्रोतों से सत्यापन जरूर करें।
: रोगों के निदान में आयुर्वेद का दिशा निर्देशन
Thu, May 2, 2024
*रोगों के निदान में आयुर्वेद का दिशा-निर्देशन*
रोग के जड़ से निदान के लिए सम्पूर्ण उपाय किया जाना चाहिए, जिस प्रकार काटा हुआ वृक्ष फिर से हरा हो जाता है उस प्रकार यदि रोग को समूल नष्ट न किया जाए तो वह फिर से बढ़ जाता है। जैसे अनुकूल ऋतु व जल उपलब्ध होने पर जड़ से पुनः शाख व पत्ते फूट आते है ।
उसी प्रकार
यदि रोग को दबा दिया जाए और रोग को कारण सहित समूल नष्ट न किया जाए तो अपने अनुकूल दूषित आहार-विहार और अपथ्य का संयोग होने पर ऐसा रोग फिर से पनप कर शरीर को ग्रस्त कर लेता है ।
बुद्धिमान को चाहिए कि रोग के लक्षण देखते ही जो भी उचित उपाय हो उसे शीघ्र कर रोग को समूल नष्ट करने का प्रयत्न करें, रोग पैदा करने व बढ़ाने वाला खान- पान और रहन- सहन त्याग दे।
जैसे मूर्ख व्यक्ति अपने शत्रु को नही पहचान पाता और धोखा खा जाता है उसी प्रकार मूर्ख व्यक्ति अज्ञानता, आलस्य और लापरवाही के कारण अपने शरीर में उत्पन्न हुए रोग को पहचान नही पाता लिहाज़ा अनजाने ही रोग का शिकार हो जाता है ।