: भोपाल करनी सेना द्वारा ब्रम्हाकुमारी बहनों को सम्मानित किया गया
Sun, Apr 7, 2024
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मध्य प्रदेश जिला भोपाल की करणी सेना द्वारा होली मिलन समारोह में किया गया ब्रह्मकुमारी बहनों का सम्मान*
मध्य प्रदेश भोपाल जिला के करणी सेना के द्वारा होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया l कार्यक्रम में विशेष रूप से ब्रह्मकुमारी बहनों को आमंत्रित किया गया l कार्यक्रम में करणी सेना के नीलम राजपूत प्रदेश उपाध्यक्ष रचना राजपूत प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं संभाग अध्यक्ष ममता राजपूत संग धनुषा राजपूत जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष द्वारा ब्रह्माकुमारीज के कृष्णा नगर भोपाल सेवाकेंद्र प्रभारी बी.के. मधु बहन जी एवं बीके प्रिय बहन का स्वागत सम्मान किया गया तत्पश्चात बहुतही सुंदर फूलों की वर्षा कर होली मिलन कार्यक्रम मनाया गया जिसमें करणी सेना के अन्य कार्यकारी अधिकारी और सदस्य गण शामिल थे अंत में ब्रह्मकुमारी बहनों ने सभी को ईश्वरीय ज्ञान दे संस्था के द्वारा की जा रही सेवाओं से परिचय कराया और सभी को ईश्वरीय उपहार के रूप में शिव संदेश पुस्तिका का वितरण कियाl
: खुशी एवम् शान्ति के आंतरिक नियम
Sat, Mar 23, 2024
आन्तरिक बलनियम - लक्ष्य और शांतिआयुर्वेद में सोना, चांदी, ताम्बा, अभ्रक आदि की भस्म बनाकर उनके सेवन का विधान है !जहर का भी बड़ा लाभ बताया गया है, पर वह संभव तभी होता है जब विष को विधि पूर्वक शुद्ध किया जाए !नेत्रों की उपयोगिता अपने लिए जानकारियां एकत्र कर देने के लिए है, पर वाणी का महत्व उससे अधिक है ! उसके माध्यम से पढ़ा और पढ़ाया जा सकता है ! जन मानस को उद्वेलित करने में वाणी का प्रयोग होता है, इसे वशीकरण शब्द कहा गया है !मीठे वचनों की तुलना वशीकरण मन्त्र से की जाती है ! द्रोपदी के मुख से कुछ अक्षर कडवे निकले थे कि उतने भर से महाभारत खड़ा हो गया और कितनी विशाल सेना का सफाया हो गया !जीभ को परिष्कृत करना सरस्वती की साधना कही जाती है !आहार के संयम से आरोग्य और दीर्घ जीवन, दोनों मिलते हैं ! मौन धारण का अभ्यास समस्त तपों में उच्चकोटि का है !एकाग्रता और एकात्मता दोनों ही साधनाएं मौन धारण से बनी हैं ! जिसने जीभ की ये दोनों साधनाएं कर ली, समझना चाहिए कि उसका इन्द्रिय सयम समग्र हो गया है !तपस्वी (जरूरी नहीं वेश भूसा वाला ही हों) की वाणी अमोद्य होती है ! वह शब्दभेदी शब्द बोलता है !-
: क्यूं खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर के बराबर
Wed, Mar 20, 2024
खाना अच्छे से पचे इसके लिए वागभट्ट जी ने सूत्र दिए।
"भोजनान्ते विषं वारी"
(
मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )
इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये।
अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???
1
घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना.....
तो
अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है,
जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता है.....
पेस्ट में बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है....
उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है.....
(बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )
पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की प्रक्रिया शुरू होती है....
तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं ।
तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये....
जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खींचने वाले पत्थर तोड़ने वाले)
उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको घंटे बाद पानी पीना चाहिए.....
अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ??? ...
तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं !
अब आप पूछेंगे ये मिनट का calculation ????
बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं
तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है.....
और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है....
तो पानी - पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45
मिनट का है...
तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये।
अच्छा खाएं , व्यायाम करें और स्वस्थ रहें 🙏
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