: पानी, तेल या दूध का कुल्ला करने के फायदे
Sat, Jun 22, 2024
पानी, तेल या दूध का कुल्ला करने के फायदे
कुल्ला एक ऐसी विधि है जिससे आप बिना दवा के जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, गले के रोग, मुंह के छाले, शरीर को डी टोक्सिफाय करने, गर्दन के सर्वाइकल जैसे रोगों से मुक्ति पा सकते हैं. आइये जानते हैं कुल्ला करने की सही विधि और इसके चमत्कारिक लाभ.
पानी का कुल्ला
मुंह में पानी का कुल्ला तीन मिनट तक भर कर रखें. इससे गले के रोग, जुकाम, खांसी, श्वांस रोग, गर्दन का दर्द जैसे कड़कड़ाहट से छुटकारा मिलता है. नित्य मुंह धोते समय, दिन में भी मुंह में पानी का कुल्ला भर कर रखें. इससे मुंह भी साफ़ हो जाता है.
मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोएं. ऐसा दिन में तीन बार करें. जब भी पानी के पास जाएँ मुंह में पानी का कुल्ला भर लें और नेत्रों पर पानी के छींटे मारें, धोएं. मुंह का पानी एक मिनट बाद निकाल कर पुनः कुल्ला भर लें. मुंह का पानी गर्म ना हो इसीलिए बार बार कुल्ला नया भरते रहें.
भोजन करने के बाद गीले हाथ तौलिये से नहीं पोंछे. आपस में दोनों हाथों को रगड़ कर चेहरा व् कानों तक मलें. इससे आरोग्य शक्ति बढती है. नेत्र ज्योति ठीक रहती है.
गले के रोग, सर्दी जुकाम या श्वांस रोग होने पर थोडा गुनगुना पानी ले कर इसमें सेंधव् (सेंधा) नमक मिला कर कुल्ला करना चाहिए, इस से गले, कफ, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में बहुत फायदा होता है.
तेल का कुल्ला
सुबह सुबह बासी मुंह में सरसों या तिल का तेल भर कर पूरे 10 मिनट तक उसको चबाते रहें, ध्यान रहे ये निगलना नहीं है, ऐसा करने से मुंह और दांतों के रोग तो सभी ठीक होंगे ही, साथ में पूरी बॉडी डी टोक्सिफाय होगी. अनेक रोगों से मुक्त होने की इस विधि को तेल चूषण विधि कहा जाता है. आयुर्वेद में इसको गण्डूषकर्म कहा जाता है और पश्चिमी जगत में इसको आयल पुल्लिंग के नाम से जाना जाता है.
दूध का कुल्ला
अगर मुंह में या गले में छाले हो जाएँ और किसी भी दवा से ठीक ना हो रहें हो तो आप सुबह कच्चा दूध (अर्थात बिना उबला हुआ ताज़ा दूध) मुंह में कुछ देर तक रखें. और ध्यान रहे इस दूध को आपको बाहर फेंकना नहीं है. इसको मुंह में जितना देर हो सके 10 से 15 मिनट तक रखें, कुछ देर बाद बूँद बूँद कर के ये गले से नीचे उतरने लगेगा.. इस प्रयोग को दिन में 2-4 बार कर सकते हैं. आपको मुंह, जीभ और गले के छालो में पहले ही दिन में आराम आना शुरू हो जाये👍🏼
: बैड कोलेस्ट्रॉल से पाना है छुटकारा तो पिएं भिंडी का पानी
Fri, Jun 21, 2024
*बैड कोलेस्ट्रॉल से पाना है छुटकारा तो पिएं भिंडी का पानी*
क्या भिंडी का पानी पीने से सेहत को होते हैं फायदे?
भिंडी की सब्जी में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन बी6 के साथ-साथ डाइटरी फाइबर भी पाया जाता है। भिंडी का सेवन करने और भिंडी का पानी पीने से इन सभी पोषक तत्वों का फायदा आपको मिल सकता है।
कोलेस्ट्रॉल कम करता है
भिंडी के पानी में कुछ ऐसे कार्ब्स पाए जाते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाने का काम करते हैं। एक स्टडी में पाया गया कि भिंडी का पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल को संतुलित करने में मदद होती है। इसी तरह यह पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है जिससे शरीर में फ्लुइड सर्कुलेशन भी बेहतर तरीके से होता है।
शुगर लेवल रहता है कंट्रोल में
डायबिटीज के मरीजों का शुगर लेवल हाई हो तो उन्हें कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। दावे किए जाते हैं कि भिंडी की सब्जी को रातभर पानी में भिगोकर उसका पानी पीने से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है। दरअसल, भिंडी में पाए जाने वाले पॉलीफेनोल्स और फ्लेवेनॉइड्स जैसे तत्व शरीर में पहुंचकर शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में (ways to control blood sugar level from rising) सहायता करते हैं। इसी तरह भिंडी का पानी पीने से फ्री-रैडिकल्स से होनेवाले डैमेज (Free radicals damage) से भी सुरक्षा मिलती है जो कई गम्भीर बीमारियों का रिस्क फैक्टर माना जाता है।
कैसे तैयार किया जाता है भिंडी का पानी?
भिंडी का पानी बनाने के लिए आप भिंडी की 4-5 फलियां लें। इसे लम्बे-लम्बे टुकड़ों में काटें। फिर एक कप पानी में कटी हुई भिंडी को डाल दें। अब इसे रातभर के लिए भिगोकर रखें और अगले दिन सुबह इस पानी को पीएं।
नोट जानकारी में आपको संशय लगने पर आप उपयोग से पूर्व अन्य स्रोतों से या राष्ट्रिय प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र से सत्यापन जरूर करें।
: सिरदर्द को 5 मिनट में ठीक करने वाली प्राकृतिक चिकित्सा.
Tue, Jun 18, 2024
सिरदर्द को 5 मिनट में ठीक करने वाली प्राकृतिक चिकित्सा...
नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिल्कुल अलग - अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं।
दाहिना नासिका छिद्र "सूर्य" और बायां नासिका छिद्र "चन्द्र" के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है।
सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें
और बस ! पांच मिनट में आपका सरदर्द "गायब" है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है।
अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें...
यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में "तरोताजा" महसूस करें।
दाहिना नासिका छिद्र "गर्म प्रकृति" रखता है और बायां "ठंडी प्रकृति"
अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह।
प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ।
अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें।
बस इन्हें आजमाइए और बिना दवाओं के स्वस्थ महसूस करें।