: पैतृक संपत्ति और विरासत में मिली संपत्ति में क्या अंतर है ? हिंदू कानून के तहत परिवार के सदस्यों के अधिकारों को निर्धारित करने में यह अंतर महत्वपूर्ण है।
Fri, Dec 27, 2024
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पैतृक संपत्ति और विरासत में मिली संपत्ति में क्या अंतर है?*
हिंदू कानून के तहत परिवार के सदस्यों के अधिकारों को निर्धारित करने में यह अंतर महत्वपूर्ण है।
*1. पैतृक संपत्ति*
– चार पीढ़ियों से पुरुष वंश के माध्यम से अविभाजित संपत्ति के रूप में परिभाषित।
– कानूनी उत्तराधिकारियों, जिन्हें सहदायिक कहा जाता है, को जन्म से ऐसी संपत्ति पर अंतर्निहित अधिकार होता है।
– सभी सहदायिकों की सहमति के बिना संपत्ति को बेचा या अलग नहीं किया जा सकता।
*2. विरासत में मिली संपत्ति*
– मालिक की मृत्यु के बाद वसीयत, समझौते या विरासत के माध्यम से अर्जित संपत्ति को संदर्भित करता है।
– उत्तराधिकारी के पास इसके उपयोग या बिक्री पर पूर्ण स्वामित्व और विवेकाधिकार होता है।
– यह स्वचालित रूप से वंशजों को नहीं मिलती है और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 द्वारा शासित होती है।
: वीर जिजामाता सम्मान 19 जनवरी 2025 को रविन्द्र भवन भोपाल में, क्रीड़ा भारती का नारा है: "खेलों से राष्ट्र निर्माण"।
Thu, Dec 26, 2024
वीर जिजामाता सम्मान :
(सार) वीर जिजामाता, छत्रपति शिवाजी महाराज की माता थी। जिजामाता ने ही शिवाजी के चरित्र को आकार देने और उनमें राष्ट्र के प्रति गर्व व दृढ़ संकल्प की भावना उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा अनेक युद्ध कौशल सिखाये । शिवाजी के जीवन पर हिन्दुत्व का विशेष प्रभाव पड़ा क्योंकि जिजामाता एक सशक्त हिंदुत्व की अनुयाई थी । जिजामाता ने ही बालक शिवाजी को छत्रपति शिवाजी बनाया ।
इस प्रसंग से जब किसी खिलाड़ी व उसकी माता के जीवन से तुलना की जाती है तो यह कहा जा सकता है कि जिजामाता जैसा ही त्याग और वैसी ही तपस्या खिलाड़ी की माता करती है, माँ ही एक विकसित होते खिलाड़ी का उचित प्रकार से संगोपन करती है तथा आवश्यकताओं का पूर्ण रूप से ध्यान रखती है। अपनी माता के सहयोग के कारण ही खिलाड़ी सफलता के शीर्ष पर पहुँच कर यश और कीर्ति प्राप्त करते हुए राष्ट्र का नाम प्रदीप्त करते हैं। ऐसे खिलाड़ियों की माता के त्याग और कठोर परिश्रम से समाज तथा उभरते अन्य खिलाड़ियों की माताएं एवं वे माताएं भी जो अपने बच्चों को खेल की ओर जाने से रोकती हैं सब प्रेरित व परिचित हो, इसी उद्देश्य के साथ ऐसी सफल माताओं को जिजामाता सम्मान से अलंकृत किया जाता है ।
वीर जिजामाता सम्मान का उद्देश्य :
1. खेल और सामाजिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करना।
2. खेलों के प्रति युवाओं और समाज को प्रेरित करना।
3. खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना।
सम्मान का महत्व :
• यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने न केवल खेल के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि खेल भावना, अनुशासन और देशभक्ति को भी बढ़ावा दिया है।
• इसमें खिलाड़ियों के साथ-साथ कोच, आयोजक, और खेल प्रशासक भी शामिल होते हैं।
सम्मान का आयोजन :
• यह सम्मान क्रीड़ा भारती के वार्षिक या विशेष कार्यक्रमों में प्रदान किया जाता है।
वीर जिजामाता का नाम क्यों ?
राजमाता जिजाबाई न केवल शिवाजी महाराज की मां थीं, बल्कि उन्होंने अपने जीवन में साहस, अनुशासन, और नेतृत्व का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर इस सम्मान का नाम "जिजामाता सम्मान" रखा गया है।