: हल्का से उच्च, विचारों का निर्माण
Tue, Sep 19, 2023
कोई व्यक्ति अपने मन में सदा हल्का विचार करता है। मगर कुछ समय बाद उसमें बदलाव आता है और वह व्यक्ति उच्च विचार करने लगता है।
एक जानी-मानी कहानी है। वालया एक चोर लुटेरा था। वह जंगल से गुजरने वाले यात्रियों को पकड़ कर उनसे धन और गहने लूटता था। कभी उनका खून भी करता था ।
एक दिन नारद जी ने उससे पूछा कि, "यह पाप कर्म तुम क्यों कर रहे हो ?" तो वालया ने बताया कि, यह मैं अपनी पत्नी और बच्चों के लिए कर रहा हूं!" तब नारद जी ने उससे कहा, तुम अपनी पत्नी और बच्चों से पूछो कि क्या वह तुम्हारे इस पाप कर्म के हिस्सेदार होने के लिए तैयार हैं ?"
तब उसने अपने पत्नी और बच्चों से पूछा मगर वह उसके पापकर्म में हिस्सेदारी होने के लिए तैयार नहीं थे । तो वालया ने नारद जी को इस पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा। नारद जी ने उसे राम नाम जप कर तपस्या करने की सलाह दी। उसके अनुसार वह तपस्स्वी बना । जिन्होंने आगे जाकर रामायण महा चरित्र लिखा। आज वह वाल्मीकि ऋषि के नाम से जाने जाते हैं।
पहले उनके मन में जो हल्के विचार थे। उनकी जगह उच्च विचारों ने ली ।उनके विचारों ने ही उन्हें वालया से वाल्मीकि ऋषि बना दिया । इसे कहते हैं लोअर तू हाईयर।
: देखते हैं मानसिक मर्यादा
Mon, Sep 18, 2023
Education :- शिक्षा। अपनी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य नौकरी पाना और पैसा कमाना है । इस उद्देश्य से ली गई शिक्षा मनुष्य के मन को सीमित करती है।
Parents :- पालक। पालक अपने बच्चों से अपेक्षा करते हैं कि वह 90% से ज्यादा मार्क्स ले आए और आगे जाकर डॉक्टर इंजीनियर बने। इस प्रकार पालक भी अपने बच्चों के मन को सीमित करते हैं।
Society :- समाज। अपने ऊपर समाज से भी कई मर्यादाये आती है। आज हम ऐसे समाज में रहते हैं जहां हम 340 रुपए kg से टूथपेस्ट खरीदते हैं और रोज उससे दांत साफ करते हैं । मगर 180 रू kg का श्रीखंड कभी तो हमारे खाने में आता है ।
किसी कार्यक्रम में हमें आर्टिफिशियल लेमन फ्लेवर वेलकम ड्रिंक के नाम पर दिया जाता , और ओरिजिनल लेमन फिंगर बाउल में हाथ धोने के लिए दिया जाता है । इस तरह के अनेक मर्यादाये हमें समाज की ओर से मिलती है।
अगर हमारे मन को ऐसी मर्यादा दी गई है, तो भी हमारे मन में हमेशा अलग विचारो का निर्माण होते रहता है। वह कभी भी एक जैसा नहीं होता। समयनुसार या परिस्थितिनुसार वह बदलते रहता है।