: बजरंग दल का देश व्यापी प्रदर्शन 12 जून को
Tue, Jun 11, 2024
जम्मू कश्मीर में तीर्थ यात्रियों पर आतंकी हमले के विरुद्ध
बजरंग दल का देश व्यापी प्रदर्शन कल 12 जून - मिलिंद परांडे
भोपाल , 11 जून , पत्रकार वार्ता लेते हुये श्री मिलिंद परांडे केंद्रीय संगठन महामंत्री जी ने कहा कि देश की नई सरकार के शपथ ग्रहण के दिन जम्मू कश्मीर के रियासी में तीर्थ यात्रियों पर हुए पाक प्रायोजित आतंकी हमले के विरुद्ध
विश्व हिन्दू परिषद की युवा इकाई बजरंगदल द्वारा कल (12.06.24 बुधवार) सम्पूर्ण देश के जिला केंद्रों पर प्रदर्शन किया जाएगा
। इसमें हमले में बलिदान हुए तीर्थ यात्रियों को श्रद्धांजलि तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना के साथ जिहादी आतंकवाद का पुतला दहन कर महामहिम राष्ट्रपति जी को संबोधित एक ज्ञापन भी स्थानीय जिलाधिकारियों के माध्यम से दिया जाएगा।
जिहादी मानसिकता के पैर पश्चिम बंगाल, आसाम मैं भी फैल रहे है ।
जो देश के लोकतंत्र के लिये बड़ा खतरा है ।
इस पत्रकार वार्ता मैं
श्री के एल शर्मा प्रान्त कार्याध्यक्ष , श्री राजेश जैन प्रान्त मंत्री जी और जितेंद्र चौहान भी
उपस्थित रहे ।
: ध्यान करने की विधि
Mon, Jun 10, 2024
ध्यान करने की विधि
उषाकाल या संध्या काल ध्यान के लिये अधिक उपयुक्त होते हैं क्योंकि इस समय सुषुमना नाड़ी चलती है !
ध्यान जितना ही प्रगाढ़ होता है, शरीर उतना ही सुन्दर, स्वस्थ और आनंदमय बनता है !
कल्पना में मन में प्रकाश का एक बिन्दू देखते रहें ! इस बिन्दू को भगवान मान कर कहते रहें ! आप शांति के सागर हैं ! आप शांति के सागर हैं ! आप चलते फिरते भी अपने सामने बिन्दू को देखते रहें ! आप अपने इष्ट को भी देख सकते हैं ! उसे यही कहना है आप शांति के सागर हैं , शांति के सागर हैं या आप प्यार के सागर हैं, प्यार के सागर हैं ! यही अभ्यास हर परिस्थिति में करना है !
सिद्वि
ध्यान में सिद्वि तब प्राप्त होती है जब हमारे भीतर सूक्ष्म शरीर में स्थित चक्र खुल जाते हैं ! ध्यान तथा अन्य योगिक क्रियाओं के द्वारा इन चक्रों को खोला जाता है ! सहस्त्रार चक्र मन बुद्वि और परमात्म प्राप्ति का द्वार है ! सिर के उपर बिन्दू रूप का भी अभ्यास करें
अध्यात्मिक दृष्टि से उत्तम
मन की सीमाओं को तोड़कर बाहर निकलने के लिये व्यक्ति अपने लिये जिस पथ का निर्माण करता है उसे हम ध्यान कहते हैं ! प्राय मन ऐसी चीजों के बारे में नही सोचता जो वास्तव में महत्वपूर्ण होती हैं !
इसलिये ध्यान करने के लिये ऐसे विषय अथवा वस्तु का चयन करना चाहिए, जो अध्यात्मिक दृष्टि से महतवपूर्ण हो, वह कोई दिव्य पुरुष अथवा वस्तु होनी चाहिए या कोई अध्यात्मिक उत्कृष्ट प्रसंग अथवा सत्यता होनी चाहिए ! मन को न केवल दिव्य विषयों अथवा सत्यताओं में रूचि रखनी चाहिए बल्कि उसे उनको समझने एवं उनकी सराहना करने के प्रयास से ध्यान आरम्भ करना चाहिए !
: महाराणा प्रताप जी की 484वी जयंती
Sun, Jun 9, 2024
*महाराणा प्रताप जयंती (09.06.1540)*
*महाराणा प्रताप जयंती विशेष रूप से ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल महाराणा प्रताप जयंती पर भारत में वीरता और दृढ़ संकल्प की भावना प्रकट होती है। महाराणा प्रताप जयंती के उत्सव के आसपास बहुत धूमधाम और माहौल होता है, जिसमें उनके साहस और वीरता की कहानियाँ सुनाई जाती हैं। आने वाले दशकों तक, महाराणा प्रताप को हमेशा एक बहादुर योद्धा के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने अपने देश, राज्य और लोगों के लिए सेवा की।*
*महाराणा प्रताप जन्म*
*मेवाड़ के 13 वें राजपूत राजा महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को हुआ था। उनका जन्म कुंभलगढ़ किले में हुआ था, जो भारत के राजस्थान के वर्तमान राजसमंद जिले में स्थित है। महाराणा प्रताप को एक वीर योद्धा और 16 वीं शताब्दी के दौरान भारत में मुगल साम्राज्य* *के विस्तार के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है। अपने राज्य और लोगों की रक्षा करने में उनके साहसी नेतृत्व और दृढ़ संकल्प ने उन्हें भारतीय इतिहास में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बना दिया है। प्रताप जयंती