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"व्यक्ति नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि" की भावना को अपने जीवन में उतारने वाले : आज ही के दिन, 5 जून 1973 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक, श्रद्धेय Madhav Sadashiv Golwalkar का नागपुर

Ashwani Kumar Sinha

Fri, Jun 5, 2026

श्रद्धेय श्री गुरुजी (माधव सदाशिव गोलवलकर) स्मृति दिवस पर विशेष राष्ट्रचिंतन, संगठन और समर्पण का पर्याय थे श्री गुरुजी 5 जून भारतीय जनजीवन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों के लिए एक विशेष स्मृति दिवस है। आज ही के दिन, 5 जून 1973 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक, श्रद्धेय Madhav Sadashiv Golwalkar का नागपुर में निधन हुआ था। लगभग 33 वर्षों तक उन्होंने संघ का नेतृत्व करते हुए संगठन को देशव्यापी विस्तार प्रदान किया और राष्ट्रजीवन में सेवा, संगठन तथा सांस्कृतिक जागरण की मजबूत आधारशिला रखी।

19 फरवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक (नागपुर के निकट) में जन्मे श्री गुरुजी उच्च शिक्षा प्राप्त विद्वान थे। उन्होंने Banaras Hindu University से प्राणिशास्त्र (जूलॉजी) में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की तथा कुछ समय अध्यापन कार्य भी किया। विद्यार्थियों द्वारा सम्मानपूर्वक उन्हें “गुरुजी” कहकर संबोधित किया जाने लगा और यही नाम आगे चलकर उनकी पहचान बन गया।

सन् 1940 में संघ संस्थापक Keshav Baliram Hedgewar के निधन के पश्चात श्री गुरुजी ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। उनके नेतृत्व काल में संघ का विस्तार देश के विभिन्न प्रांतों तक हुआ। विभाजन की त्रासदी, 1948 में संघ पर प्रतिबंध, तथा स्वतंत्र भारत के अनेक चुनौतीपूर्ण कालखंडों में उन्होंने संगठन को दिशा और स्थिरता प्रदान की।

श्री गुरुजी का जीवन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से परे राष्ट्र समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर व्यापक प्रवास किए और समाज के विभिन्न वर्गों को संगठित करने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व में शिक्षा, सेवा, ग्राम विकास, वनवासी कल्याण और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनेक संगठनों को प्रेरणा मिली।

आज उनके स्मृति दिवस पर देशभर में स्वयंसेवक एवं समाज के विभिन्न वर्ग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनका जीवन संदेश था कि राष्ट्र की शक्ति समाज के संगठित, चरित्रवान और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों में निहित है। यही कारण है कि पांच दशक बाद भी श्री गुरुजी का योगदान राष्ट्रीय चिंतन और संगठनात्मक कार्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में स्मरण किया जाता है। "व्यक्ति नहीं, राष्ट्र सर्वोपरि" की भावना को अपने जीवन में उतारने वाले श्रद्धेय श्री गुरुजी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। 🙏🚩

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