BREAKING NEWS

विश्व पर्यावरण दिवस पर महिला मंडल ने दिया स्वच्छता और वृक्षारोपण का संदेश

आज ही के दिन, 5 जून 1973 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक, श्रद्धेय Madhav Sadashiv Golwalkar का नागपुर

नागपुर में RSS के राष्ट्रीय कार्यकर्ता विकास वर्ग-द्वितीय का समापन, कुमार मंगलम बिड़ला रहे मुख्य अतिथि

तुलसी बस्ती के पांचों मोहल्लों में चलेगा इको ब्रिक्स अभियान

ध्येय के प्रति समर्पित जीवन ही राष्ट्र निर्माण का आधार : विजय दीक्षित

Advertisment

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

शिक्षा प्रणाली में "सामूहिक सफाई" जैसी गतिविधियों को सकारात्मक दृष्टि : स्कूलों में सफाई: जापान बनाम भारत — एक सोचने पर मजबूर करने वाली हकीकत

Ashwani Kumar Sinha

Fri, Aug 22, 2025

📰 स्कूलों में सफाई: जापान बनाम भारत — एक सोचने पर मजबूर करने वाली हकीकत

जापान की शिक्षा प्रणाली का एक अनोखा पहलू है — वहाँ के स्कूलों में सफाई के लिए अलग कर्मचारी सामान्यत: नहीं रखे जाते। छात्र और शिक्षक मिलकर रोज़ाना स्वयं कक्षाओं, गलियारों और यहाँ तक कि शौचालयों की सफाई करते हैं। इस परंपरा को ओसोज़ी (Osoji) कहा जाता है। इसका उद्देश्य बच्चों को अनुशासन, जिम्मेदारी, समानता और सहयोग सिखाना है। यही कारण है कि जापान में बच्चों में कम उम्र से ही आत्मनिर्भरता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

👉 जापान का शिक्षा मंत्रालय (MEXT) इसे “विशेष गतिविधि” के रूप में पाठ्यक्रम का हिस्सा मानता है। वहाँ छात्र यह सीखते हैं कि सफाई केवल कर्मचारी का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

🔸 लेकिन भारत में परिदृश्य अलग है।
यदि किसी स्कूल में बच्चों को आज सफाई या छोटे-छोटे कामों में शामिल किया जाए, तो अक्सर लोग उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं। इसके बाद प्राचार्य और शिक्षकों को कठघरे में खड़ा कर निलंबन तक की स्थिति आ जाती है। समाज में इसे "बच्चों से काम कराना" कहकर आलोचना होती है।

👉 नतीजा यह है कि भारतीय बच्चे अनुशासन, जिम्मेदारी और सामूहिक स्वच्छता जैसे गुणों को व्यावहारिक तौर पर नहीं सीख पाते।
👉 वहीं दूसरी ओर जापान के बच्चे इसी प्रक्रिया से बड़े होकर साफ-सुथरे, जिम्मेदार और सामाजिक रूप से जागरूक नागरिक बनते हैं।

🔹 निष्कर्ष:
भारत में यदि इस जापानी परंपरा से प्रेरणा लेकर शिक्षा प्रणाली में "सामूहिक सफाई" जैसी गतिविधियों को सकारात्मक दृष्टि से शामिल किया जाए, तो यह बच्चों के हित में बड़ा कदम होगा। इससे उनमें अनुशासन, जिम्मेदारी और समाज के प्रति कर्तव्यबोध की भावना मजबूत होगी।


विज्ञापन

जरूरी खबरें