जय भवानी, जय शिवाजी” का उद्घोष आज भी हमें शक्ति देता हैं : छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस: शौर्य का प्रतीक
Ashwani Kumar Sinha
Sun, Jun 8, 2025
🛡️ छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस: शौर्य का प्रतीक, नवजागरण की शुरुआत
भोपाल, 6 जून 2025 – 6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज का ऐतिहासिक राज्याभिषेक हुआ था, जो ‘हिंदवी स्वराज्य’ की स्थापना का प्रतीक बन गया। यह दिवस पूरे भारत में ‘हिंदू साम्राज्य दिवस’ के रूप में श्रद्धा, गर्व और ऐतिहासिक स्मरण के साथ मनाया जाता है।
🌟 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक कर्मकांडी ब्राह्मण गगाभट्ट द्वारा विधिवत रूप से सम्पन्न किया गया। इस राज्याभिषेक से एक सशक्त, स्वतंत्र और धर्मनिरपेक्ष शासन की नींव पड़ी, जिसे शिवाजी महाराज ने हिंदवी स्वराज्य नाम दिया।
🎉 2025 के आयोजन की प्रमुख झलकियाँ:
रायगढ़ और कोल्हापुर में शिवराज्याभिषेक की 351वीं वर्षगांठ के भव्य आयोजन हुए। पारंपरिक अभिषेक, पोवाड़ा गायन, और ऐतिहासिक नाटकों के साथ विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
नागपुर में ईद और शिवराज्याभिषेक एक ही दिन होने के कारण पुलिस द्वारा विशेष सुरक्षा बंदोबस्त किए गए, जिससे सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहा।
सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अंग्रेजी इतिहास ने शिवाजी महाराज को एक क्षेत्रीय नायक बताकर सीमित कर दिया, जबकि वे सम्पूर्ण भारत के शासक, संस्कृति रक्षक और प्रशासनिक नवाचार के अग्रदूत थे।
🔍 शिवाजी महाराज का प्रशासनिक योगदान:
स्वराज्य की अवधारणा – जनता के लिए जनता का शासन, जो न्याय, स्वावलंबन और सम्मान पर आधारित था।
धार्मिक सहिष्णुता – शिवाजी महाराज ने किसी धर्म के प्रति भेदभाव नहीं किया। उनके शासन में सभी को समान न्याय और संरक्षण मिला।
दुर्ग नीति और नौसेना – मराठा साम्राज्य की रक्षात्मक रणनीति भारत की प्रथम संगठित नौसेना के निर्माण से जुड़ी रही।
महिलाओं एवं किसानों के अधिकार – शिवाजी ने नारी सुरक्षा, किसानों को राहत, और कर प्रणाली में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी।
📢 आज के संदर्भ में महत्त्व:
छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि:
शासन व्यवस्था में जनहित सर्वोपरि होनी चाहिए।
नैतिकता, रणनीति और आत्मसम्मान को नेतृत्व में अनिवार्य स्थान मिलना चाहिए।
संस्कृति और प्रशासन का समन्वय राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है।
✅ निष्कर्ष:
शिवराज्याभिषेक दिवस केवल एक ऐतिहासिक स्मृति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और नेतृत्व की पहचान है। यह दिन युवाओं को जागरूक करता है कि वे शिवाजी महाराज के सिद्धांतों पर चलकर राष्ट्रहित में कार्य करें – न्याय, शौर्य, धर्मनिरपेक्षता और लोककल्याण के साथ।
“जय भवानी, जय शिवाजी” का उद्घोष आज भी जनचेतना और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत करता है।
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