: अरंडी का तेल जानिए इसके फायदे
Tue, Dec 19, 2023
*हर रोग की रामबाण दवा अरंडी का तेल जानिए इसके फायदे...* ❣️❣️❣️❣️गांव में अरंडी के पौधे आज भी हर कहीं उगे हुए देखे जा सकते है... गांव के लोग अरंडी को बहुत अच्छे से जानते है, जब भी कभी मोच आ जाती हैं अरंडी के पत्ते सबसे पहले याद आते है... वैसे अब स्थिति बदली हैं, जरा सा कुछ होने पर भी डॉक्टर,मेडिकल पर टूट पड़ते है...हमनें अपनी स्थिति भले ही बदल ली हैं लेकिन पौधे ने अपना गुण धर्म नही खोया है...आज शहरी जगत में हर कहीं Castor-oil की चर्चा आपको सुनने को मिल जाएगी,उसके गुणों का बखान भी मिला जाएगा,,पर उसका सीधा इस्तेमाल कोई नही करता,ओर अधिकतर लोग पौधे को भी नही पहचानते.....अरंडी के तेल में पाए जाने वाले गुणों की वजह से यह स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों में फायदा करता है। जानते है अरंडी के तेल के फायदे1. काले धब्बे साफ़ करे -:
अरण्डी का आयल और नारियल के तेल की कुछ बुँदे ले और इसे चेहरे के काले धब्बो पर लगाए इससे काले धब्बे मिट जाएंगे।2.गठिया रोग में -:
गठिया रोगी व्यक्ति की अरंडी के तेल से मालिश करने पर उसे दर्द में आराम होता हैं। यह मांसपेशियों के दर्द को कम करता है।3.कब्ज में फायदा -:
कब्ज के लिए कैस्टर ऑयल का उपयोग कैसे करें तो इसके लिए आधा चम्मच तेल एक कप गर्म दूध में मिलाकर पियें।4. बालों के लिए -:
इस तेल को बालों की सुंदरता और बालों की समस्या के लिए प्रयोग किया जाता है। बालों में अरंडी का तेल लगाने से बाल चमकदार, लम्बे, घने होते है। इससे बालों का रूखापन और डैंड्रफ भी खत्म हो जाती है।5.पेट की चर्बी कम करे -:
हरे अरंड की २० - ५० ग्राम जड़ ले इसे धोकर कूट ले। अब २०० मिली पानी में पका ले। ५० मिली रह जाने पर इसका सेवन करे इससे पेट कम होगा।6. पाइल्स से छुटकारा -:
20 से 30 मिली अरंड के पत्ते का काढ़ा बनाकर 25 मिली एलोवेरा के रस में मिलाकर सुबह शाम पीने से पाइल्स में लाभ होगा।7. किडनी की सूजन कम करने में सहायक -:
किडनी की सूजन को कम करने में अरंड की मींगी को पिसे। इसे गर्म करके पेट के आधे भाग में लेप करे सूजन में आराम होगा।8.आँखों में -:
अरंडी के तेल की कुछ बुँदे ले और आँखों के आसपास हल्की मालिश करे इससे आँखों की सूजन में आराम होगा।9. झुर्रिया मिटाये -:
यह मॉइश्चराइजर की तरह काम करता है जो समय से पहले आने वाले बुढ़ापे को रोकता है और झुर्रियों को खत्म करता है।10.साइटिका के दर्द को कम करे -:
यह साइटिका के दर्द को कम करने में मदद करता है।11. मासिक विकार में राहत -
पीरियड्स में होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए अरंड के पत्ते गर्म करके पेट पर बाँधने से लाभ होता है।12.मस्से के लिए -:
एलोवेरा रस में अरंडी का तेल मिलाकर लगाने से मस्सों की जलन में राहत मिलती है।13.शरीर की मालिश -
बॉडी मसाज के लिए इस तेल का उपयोग कर सकते है इससे बॉडी पर चमक आती है।
(जानकारी में किसी प्रकार की अस्पष्टता या संदेह के बढ़ने पर उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती कि वह नेचुरल इंस्टीट्यूट आफ नेचरोपैथी या अन्य स्रोत के साथ सत्यापन व जांच करें और उचित पेशेवर की सलाह लें)
: पेशाब रोकना जानिये कितना नुकसान
Sun, Dec 17, 2023
पेशाब रोकने से हो सकती हैं किडनी फेल।
जानिये कितना नुक्सान देह हैं पेशाब रोकना।
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जितना लंबे समय तक आप यूरीन को रोककर रखेगें, आपका ब्लैडर बैक्टीरिया को अधिक विकसित कर कई प्रकार की स्वास्थय समस्याओं का कारण बनेगा। आइए जानें यूरीन को ज्यादा देर रोकना आपके लिए कैसे नुकसानदेह होता है।
यूरीन रोकना
यूरीन शरीर की सामान्य प्रक्रिया है, जिसे महसूस होने पर एक से दो मिनट के अंदर निष्कासित कर देना चाहिए। वैसे तो ब्लैडर के भरने पर स्वत: प्रतिक्रिया तंत्र आपके मस्तिष्क को बॉशरूम जाने का संकेत भेजती है। पसीने की तरह यूरीन के माध्यम से भी शरीर के गैर जरूरी तत्व बाहर निकलते हैं। यदि वह थोड़े समय भी अधिक शरीर में रहते हैं तो संक्रमण की शुरुआत हो सकती है। आइए जानें यूरीन को रोकने से शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ सकता है।
क्या यूरीन को ज्यादा देर रोकना सही है ?
कुछ लोग यूरीन को कुछ मिनट के लिए तो कुछ से लंबे समय तक रोक कर रखते है। आप यूरीन कितनी देर तक रोक कर रखते हैं यह यूरीन की उत्पादन मात्रा पर निर्भर करता है। इसके अलावा यह हाइड्रेशन की स्थिति, तरल पदार्थ और ब्लैडर की कार्यक्षमता पर भी निर्भर करता है। लेकिन यूरीन को अक्सर रोककर रखने वाले लोग इसे पता लगाने की अपनी क्षमता को खो देते हैं। जितना लंबे समय तक आप यूरीन को रोककर रखेगें, आपका ब्लैडर बैक्टीरियों को अधिक विकसित कर कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम का कारण बन सकता है।
किडनी में स्टोन--
यूरीन को एक से दो घंटे रोकने के कारण महिलाओं व कामकाजी युवाओं में यूरीन संबंधी दिक्कतें आती है। जिसमें शुरूआत ब्लेडर में दर्द होता है। साथ ही 8 से 10 घंटे बैठ कर काम करने वाले युवाओं को यूरीन की जरूरत ही तब महसूस होती हैं, जबकि वह कार्य करने की स्थिति बदलते हैं। जबकि इस दौरान किडनी से यूरिनरी ब्लेडर में पेशाब इकठ्ठा होता रहता है। हर एक मिनट में दो एमएल यूरीन ब्लेडर में पहुंचता है, जिसे प्रति एक से दो घंटे के बीच खाली कर देना चाहिए। ब्लेडर खाली करने में तीन से चार मिनट की देरी में पेशाब दोबारा किडनी में वापस जाने लगता है, इस स्थिति के बार-बार होने से पथरी की शुरूआत हो जाती है। क्योंकि पेशाब में यूरिया और अमिनो एसिड जैसे टॉक्सिक तत्व होते हैं।
यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन--
कभी भी तेज आये यूरीन को रोके नहीं, जब भी यूरीन महसूस हो तुरंत जाएं वरना यूटीआई होने का खतरा बढ़ जाएगा। यूरीन रोकने के कारण यह संक्रमण फैलता है। यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी मूत्र मार्ग में संक्रमण महिलाओं को होने वाली बीमारी है, इसे यूटीआई नाम से भी जाना जाता है। मूत्र मार्ग संक्रमण जीवाणु जन्य संक्रमण है जिसमें मूत्र मार्ग का कोई भी भाग प्रभावित हो सकता है। हालांकि मूत्र में तरह-तरह के द्रव होते हैं किंतु इसमें जीवाणु नहीं होते। यूटीआई से ग्रसित होने पर मूत्र में जीवाणु भी मौजूद होते हैं। जब मूत्राशय या गुर्दे में जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं और बढ़ने लगते हैं तो यह स्थिति आती है।
इन्टर्स्टिशल सिस्टाइटिस--
इन्टर्स्टिशल सिस्टाइटिस एक दर्दनाक ब्लैडर सिंड्रोम है, जिसके कारण यूरीन भंडार यानी ब्लैडर में सूजन और दर्द हो सकता है। इन्टर्स्टिशल सिस्टाइटिस से ग्रस्त लोगों में अन्य लोगों की तुलना में यूरीन बार-बार लेकिन कम मात्रा में आता है। अभी तक इसके सही कारणों की जानकारी नहीं मिल पायी हैं लेकिन डॉक्टरों का मानना हैं कि यह जीवाणु संक्रमण के कारण होता है। इन्टर्स्टिशल सिस्टाइटिस के आम लक्षणों में दर्दनाक श्रोणि, बार-बार यूरीन महसूस होना और कुछ मामलों में ग्रस्त व्यक्ति एक दिन में 60 बार तक यूरीन जाता है। इस समस्या का कोई इलाज नहीं है, लेकिन उपचार से लक्षणों को कम किया जा सकता है।
किडनी फेलियर--
किडनी फेलियर एक मेडिकल समस्या है जो किडनी के अचानक ब्लड से विषाक्त पदार्थों और अवशेषों के फिल्टर करने में असमर्थ होने के कारण होती है। यूरीन से संबंधित हर तरह के इंफेक्शन किडनी पर बुरा असर डालते हैं। बॉडी में यूरिया और क्रियटिनीन दोनों तत्व ज्यादा बढ़ने की वजह से यूरीन के साथ बॉडी से बाहर नहीं निकल पाते हैं, जिसके कारण ब्लड की मात्रा बढ़ने लगती है। भूख कम लगना, मितली व उल्टी आना, कमजोरी लगना, थकान होना सामान्य से कम पेशाब आना, ऊतकों में तरल पदार्थ रुकने से सूजन आना आदि इसके लक्षण है।
यूरीन में बहुत अधिक गहरा होना--
बहुत अधिक देर यूरीन को रोकने से यूरीन का रंग भी बदलने लगता है। हालांकि ऐसा होने के पीछे सबसे अधिक संभावना संक्रमण की होती है। इसके अलावा बीट, बेरीज, जामुन, शतवारी जैसे कुछ खाद्य पदार्थ के कारण भी यूरीन का रंग प्रभावित होता है। विटामिन बी यूरीन के रंग को हरे और शलजम लाल रंग में बदल देता है।
ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर होना--
दवाब के बाद भी यदि तीन से चार मिनट भी पेशाब को रोका गया तो यूरिन के टॉक्सिक तत्व किडनी में वापस चले जाते हैं, जिसे रिटेंशन ऑफ यूरिन कहते हैं। इसके अलावा यूरीन बार-बार रोकने से ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और यह यूरीन करने की क्षमता को भी कम करता है।
: हरा जूस सर्दियों में बीमारियों से बचाने में सबसे कारगर
Wed, Dec 13, 2023
*सर्दियों में बीमारियों से बचाने में सबसे कारगर है यह हरा जूस, ब्लड प्रेशर कर देगा नॉर्मल, स्किन के लिए भी वरदान*
पालक का जूस पोषक तत्वों से भरपूर होता है और हर मौसम में इसका सेवन करना लाभकारी माना जाता है. वेबएमडी के रिपोर्ट के अनुसार पालक में भरपूर मात्रा में पानी होता है, जो सर्दियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. पालक में कैल्शियम, मैंगनीज और विटामिन K की मात्रा पर्याप्त होती है, जिस वजह से इसे हड्डियों के लिए वरदान माना जाता है. यह हड्डियां मजबूत कर सकता है.हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी पालक का जूस रामबाण माना जा सकता है. पालक में उच्च मात्रा में नाइट्रेट होते हैं, जो ब्लड प्रेशर के स्तर को नियंत्रित करने और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं. एक स्टडी में पाया गया कि पालक खाने से इसमें शामिल प्रतिभागियों का ब्लड प्रेशर लेवल प्रभावी रूप से कम हो गया.सर्दियों में बीमारियों से बचाने के लिए पालक का जूस पीना चाहिए. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आपकी इम्यूनिटी को मजबूती प्रदान करते हैंपालक को स्किन हेल्थ के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. पालक में कैरोटीनॉयड उच्च मात्रा में होता है, जिसे आपका शरीर विटामिन ए और विटामिन सी में बदल सकता है. यह विटामिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा के स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा कार्य को बढ़ावा देता है. सर्दियों में स्किन ड्राईनेस से पालक का जूस राहत दिला सकता है.
🌹🙏(जानकारी में किसी प्रकार की अस्पष्टता या संदेह के बढ़ने पर उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वह नेचुरल इंस्टीट्यूट आफ नेचरोपैथी या अन्य स्रोत के साथ सत्यापन व जांच करें और उचित पेशेवर की सलाह लें)