: पित की थैली में पथरी हेतु कुछ नुस्खे
Admin
Sun, Mar 10, 2024
पित्त की थैली की पथरी
80% पित्त की थैली की पथरी कोलेस्ट्रॉल के जमने या सख्त होने के कारण होती है।
पित्त की पथरी के कारण पेट में असहनीय दर्द होता है, कई बार उल्टी भी हो सकती है। खाना पचने में दिक्कत होने लगती है, पेट में अपच और भारीपन रहता है।
पित्त की थैली में पथरी होने के बारे में यही कहा जाता है कि बिना ऑपरेशन के इसे निकालना मुश्किल है।
ऐसे में यदि गॉल ब्लेडर स्टोन की हो तो जाहिर है ऑपरेशन का विचार बनाया ही होगा, लेकिन कुछ घरेलू उपाय अपनाकर देखें, संभव है कि पथरी गल जाए।
ये उपाय न केवल पथरी को गला देंगे बल्कि पाचन को दुरूस्त करके दर्द को भी ठीक कर देंगे।
⚫1. सेब का जूस और सेब का सिरका-
सेब में पित्त की पथरी को गलाने का गुण होता है, लेकिन इसे जूस के रूप में सेब के सिरके के साथ लेने पर यह ज्यादा असरकारी होता है। सेब में मौजूद मैलिक एसिड पथरी को गलाने में मदद करता है तथा सेब का सिरका लिवर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता, जो पथरी बनने के लिए जिम्मेदार होता है। यह घोल न केवल पथरी को गलाता है बल्कि दोबारा बनने से भी रोकता है और दर्द से भी राहत देता है।
उपचार
एक गिलास सेब के जूस में, एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं। इसे रोजाना दिन भर में दो बार पीएं।
⚫2. नाशपाती का जूस
नाशपाती के आकार की पित्त की थैली को नाशपाती द्वारा ही साफ किया जाना संभव है। नाशपाती में मौजूद पैक्टिन कोलेस्ट्रॉल को बनने और जमने से रोकता है। यूं भी नाशपाती गुणों की खान है जिसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं।
उपचार
एक गिलास गरम पानी में, एक गिलास नाशपाती का जूस और दो चम्मच शहद मिलाकर पीएं। दिन में तीन बार पियें।
⚫3. चुकंदर, खीरा और गाजर का जूस
जूस थेरेपी को पित्त की थैली के इलाज के लिए घरेलू उपचारों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
चुकंदर न केवल शरीर का मजबूती देता है बल्कि गॉल ब्लेडर को साफ भी करता है साथ ही लिवर के कोलोन को भी साफ करता है।
खीरा में मौजूद ज्यादा पानी की मात्रा लिवर और गॉल ब्लेडर दोनों को डिटॉक्सीफाई करती है। गाजर में भी विटामिन सी और उच्च पोषक तत्व होने के कारण यही गुण होते हैं।
उपचार
एक चुकंदर, एक खीरा और चार गाजर को लेकर जूस तैयार करें। इसको प्रतिदिन दो बार पीना है। सामग्री की मात्रा बराबर हो।
⚫4. पुदीना
पुदीना को पाचन के लिए सबसे अच्छी घरेलू औषधि माना जाता है जो पित्त वाहिका तथा पाचन से संबंधित अन्य रसों को बढ़ाता है। पुदीना में तारपीन भी होता है जो कि पथरी को गलाने में सहायक है। पुदीने की पत्तियों से बनी चाय गॉल ब्लेडर स्टोन से राहत दे सकती है।
उपचार
पानी को गरम करें, इसमें ताजी या सूखी पुदीने के पत्तियों को उबालें। हल्का गुनगुना रहने पर पानी को छानकर इसमें शहद मिलाएं और पी लें। दिन में दो बार पियें।
⚫5. खान-पान और दिनचर्या में बदलाव
रोजाना 8 से 10 गिलास पानी जरूर पियें चाहे प्यास न भी लगी हो।
वसायुक्त या तेज मसाले वाले खाने से बचें
प्रतिदिन कॉफी जरूर पीएं। दिन में एक से दो कप काफी हैं। कॉफी भी पित्त वाहिका को बढ़ाती है जिससे पित्त की थैली में पथरी नहीं होती।
अपने खाने में विटामिन सी की मात्रा बढाएं। दिनभर में जितना ज्यादा संभव हो विटामिन सी से भरपूर चीजें खाएं।
हल्दी, सौंठ, काली मिर्च और हींग को खाने में जरूर शामिल करें।
सभी सुखी और निरोगी रहे
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