बरसात में स्वास्थ्य के लिए स्वाद पर नियंत्रण रखें : आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विशेषज्ञों की सलाह – जठराग्नि कमजोर होने से पाचन बिगड़ता है
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Jun 28, 2025
📰 "मानसून में खानपान को लेकर बरतें विशेष सावधानी"
आयुर्वेद और नेचुरोपैथी विशेषज्ञों की सलाह – जठराग्नि कमजोर होने से पाचन बिगड़ता है, करें संतुलित आहार का चयन
भोपाल / पुणे | 26 जून 2025:
मानसून जहां वातावरण को शीतलता और हरियाली से भर देता है, वहीं यह मौसम शरीर की पाचन क्षमता यानी "जठराग्नि" को सबसे अधिक प्रभावित करता है। आयुर्वेदाचार्यों और राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान, पुणे (NIN) के विशेषज्ञों ने चेताया है कि वर्षा ऋतु में लापरवाही बरतने पर पाचन गड़बड़ी, अपच, एसिडिटी, गैस, त्वचा विकार और संक्रमण जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
🌧️ मानसून में क्यों कमजोर होती है जठराग्नि?
आयुर्वेद के अनुसार, जठराग्नि यानी पाचन अग्नि शरीर की वह शक्ति है जो भोजन को पचाकर उसका रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि आदि में रूपांतरण करती है। मानसून में वातावरण में नमी और भारीपन (गुरु गुण) बढ़ने से यह अग्नि मंद पड़ जाती है। इससे शरीर में अमाशय दोष और कफ-वात विकार सक्रिय हो जाते हैं।
🧪 राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र (NIN, पुणे) की रिपोर्ट के अनुसार मानसून में शरीर की मेटाबोलिक क्रिया धीमी हो जाती है और संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। मौसम के बदलाव के साथ पाचन संस्थान पर दबाव बढ़ता है।
✅ विशेषज्ञों की सलाह – ये करें, ये न करें:
🍽️ क्या खाएं:
गुनगुना, ताजा, हल्का और सुपाच्य भोजन
मूंग दाल, दलिया, खिचड़ी, अदरक और हल्दीयुक्त सब्ज़ी
सूप, छाछ, नींबू पानी, तुलसी जल
पकाया हुआ फल – जैसे सेब, पपीता
घी की कुछ मात्रा – पाचन अग्नि को उत्तेजित करता है
🚫 क्या न खाएं:
कच्चा सलाद, दही रात में, बासी भोजन
तली-भुनी चीजें, समोसा, चाट, फास्ट फूड
ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम
अधिक मांसाहार या भारी दालें (चना, राजमा)
सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ
🕯️ आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या (ऋतुछार्य):
भोजन समय पर करें, ओवरईटिंग से बचें
भोजन से पहले अदरक-नींबू-शहद चाटना लाभकारी
त्रिफला, पुदीना या जीरा जल का उपयोग करें
प्राणायाम व योग से पाचन शक्ति बढ़ाएं
आयुर्वेदिक चूर्ण जैसे "अविपत्तिकर चूर्ण" या "हिंग्वाष्टक चूर्ण" चिकित्सकीय सलाह से लें
🗣️ विशेषज्ञों का मत:
🔹 डॉ. केतन वडके (NIN, पुणे)
"मानसून के दौरान शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। आयुर्वेद के अनुसार जठराग्नि की रक्षा करना ही रोगों से बचाव का आधार है। हल्का, गर्म, ताजा और सीजनल आहार ही उत्तम है।"
🔹 वैद्य प्राची जोशी (आयुर्वेदाचार्य)
"वर्षा ऋतु में वात और कफ दोनों ही बढ़ते हैं। गड़बड़ खानपान और बासी चीज़ें शरीर में आम (टॉक्सिन) बढ़ाकर पेट से लेकर त्वचा तक की समस्याओं का कारण बनती हैं।"
📣 जन-जागरूकता की अपील:
"स्वास्थ्य के लिए स्वाद पर नियंत्रण रखें" – यह मौसम उपचार से ज़्यादा रोकथाम और अनुशासित दिनचर्या की मांग करता है। यदि आप रोगमुक्त रहना चाहते हैं तो खानपान में सरलता, ताजगी और संतुलन सबसे बड़ी दवा है।
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