AGMARK या ट्रेडमार्क मिलने के नियम क्या हैं? : नकली घी-तेल-मसालों पर ट्रेडमार्क और AGMARK कैसे मिल जाते हैं? – जांच प्रक्रिया, नियम और उपभोक्ता की सतर्कता जरूरी
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Jul 16, 2025
📰 विशेष जनहित समाचार: "नकली घी-तेल-मसालों पर ट्रेडमार्क और AGMARK कैसे मिल जाते हैं? – जांच प्रक्रिया, नियम और उपभोक्ता की सतर्कता जरूरी"
👉 भोपाल, भारत – आज देशभर के बाज़ारों में 400-600 रुपये प्रति किलो मिलने वाले ब्रांडेड घी और मसाले उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रहे हैं। ऐसे उत्पादों की कीमतें वास्तविक उत्पादन लागत से भी कम होने पर संदेह होता है कि क्या ये असली हैं या नकली? सबसे बड़ा सवाल यह उठता है – इन नकली या मिलावटी उत्पादों को ट्रेडमार्क (TM) और एगमार्क (AGMARK) कैसे मिल जाते हैं?
🔍 क्या है ट्रेडमार्क और एगमार्क?
ट्रेडमार्क (™️): एक ब्रांड का नाम या लोगो होता है जिसे रजिस्ट्रार ऑफ ट्रेडमार्क (भारत सरकार) के माध्यम से रजिस्टर किया जाता है। इसका संबंध उत्पाद की पहचान से होता है, गुणवत्ता से नहीं।
AGMARK: कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता की सरकारी मुहर है। इसे कृषि विपणन निदेशालय (Directorate of Marketing & Inspection) द्वारा दिया जाता है। AGMARK गुणवत्ता का सरकारी प्रमाण माना जाता है।
📜 AGMARK या ट्रेडमार्क मिलने के नियम क्या हैं?
AGMARK के लिए आवेदन:
निर्माता को सरकार के पोर्टल पर आवेदन करना होता है।
प्रोडक्शन यूनिट का निरीक्षण किया जाता है।
लैब टेस्टिंग होती है: नमूने सरकारी मानकों के अनुसार जांचे जाते हैं।
पास होने पर ही लाइसेंस मिलता है।
ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन:
केवल नाम, लोगो या ब्रांड को कानूनी सुरक्षा मिलती है।
इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है, और इसमें गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती।
⚠️ समस्या कहाँ है?
कई नकली या मिलावटी उत्पाद AGMARK का जालसाजी से उपयोग कर लेते हैं।
छोटे दुकानदार और लोकल ब्रांड बिना सर्टिफिकेशन के पैकिंग पर TM या AGMARK जैसे शब्द लिख देते हैं।
मार्केट में 400-500 रुपए किलो का देसी घी असली नहीं हो सकता, क्योंकि शुद्ध देसी गाय का घी बनाने में 800–1200 रुपए प्रति किलो की लागत आती है।
मसालों में ईंट का पाउडर, रंजक, टाल्कम पाउडर, पॉलिशिंग एजेंट जैसी चीज़ें मिलाई जाती हैं।
📌 कानून क्या कहता है?
FSSAI नियम: मिलावट साबित होने पर ₹5 लाख तक जुर्माना और 6 माह से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है।
IPC धारा 420 (धोखाधड़ी) और 272–276 (खाद्य मिलावट) भी लागू होती हैं।
AGMARK की जालसाजी पर सीधा फौजदारी मामला बनता है।
✅ उपभोक्ता क्या करें?
FSSAI नंबर की जांच करें: हर पैकिंग पर होना चाहिए।
FSSAI पोर्टल पर जाकर चेक करें।AGMARK का सच्चा प्रमाण पत्र देखें:
केवल लेबल नहीं, QR कोड या लाइसेंस नंबर की जांच करें।ब्रांड की वेबसाइट और बैक लेबल पढ़ें – निर्माता का पता, लाइसेंस नंबर, ग्राहक सेवा नंबर होना जरूरी है।
सस्ते में अच्छा ना समझें – ₹400 में शुद्ध देसी घी संभव नहीं।
शिकायत दर्ज करें:
📣 निष्कर्ष:
अगर सरकार और जनता सजग न हो, तो "घी, तेल और मसालों" के नाम पर हम ज़हर खा रहे होते हैं। हर ब्रांड की चमक और ट्रेडमार्क पर भरोसा करने से पहले खुद जांचें, सवाल करें और सही जानकारी साझा करें।
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