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निर्माण के देव विश्वकर्मा की आराधना में श्रमिक-उद्योग जगत का उत्सव : विश्वकर्मा पूजा — शिल्प, श्रम और देवशिल्प की देवभूमि में एक दिन

Ashwani Kumar Sinha

Wed, Sep 17, 2025

समाचार: विश्वकर्मा पूजा — शिल्प, श्रम और देवशिल्प की देवभूमि में एक दिन

तारीख: 17 सितंबर 2025
स्थान: भारत

शीर्षक: विश्वकर्मा पूजा: निर्माण के देव विश्वकर्मा की आराधना में श्रमिक-उद्योग जगत का उत्सव

भारत में हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा बड़े उल्लास के साथ मनाई जाती है — यह त्योहार विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो मंदिर, कारखाने, कार्यशालाएँ, निर्माण, तकनीकी और शिल्प से जुड़े हैं। इस दिन औजार, मशीनें, वाहन और निर्माण सामग्री देवता विश्वकर्मा की कृपा से सुरक्षित, सफल एवं समृद्ध कार्य की कामना के साथ पूजी जाती हैं।

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?

  • हिंदू पौराणिक कथाओं में विश्वकर्मा को देवताओं के वास्तुकार, देव-शिल्पकार और ब्रह्माण्ड का निर्माता माना जाता है।

  • कहा जाता है कि उन्होंने देवताओं के लिए विविध दिव्य अस्त्र-शस्त्र बनाए हैं — जैसे वज्र (इन्द्र का हथियार), त्रिशूल (शिव का), सुदर्शन चक्र (विष्णु का), और सुनहरी राजधानी स्वर्णलंका का निर्माण भी विश्वकर्मा से जुड़ा हुआ माना जाता है।

  • उनका संबंध वास्तुशास्त्र, तकनीकी शिल्प, औजारों की निर्मिति और उपयोग से है।

त्योहार की तिथि और शुभ मुहूर्त

  • विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के भाद्रपद माह के अंत में आता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर अनुसार 16-18 सितंबर के बीच पड़ता है। इस वर्ष यह 17 सितंबर 2025 को मनाया जा रहा है।

  • इस दिन कन्या संक्रांति भी होती है। पूजा का शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार निर्धारित होता है।

पूजा-रीति, रस्में और प्रथाएँ

  • कार्यस्थलों में पूजा: कामगार, कारीगर, उद्योगपतियों आदि अपनी कार्यशालाएँ, औजार, मशीनें, वाहन आदि देवता विश्वकर्मा को समर्पित करते हैं।

  • सफाई और सजावट: कार्यस्थल को साफ-सुथरा किया जाता है और औजारों को फूल, अक्षत व दीपक से सजाया जाता है।

  • प्रसाद और भोग: पूजा के बाद मिठाइयाँ, फल-फूल आदि बाँटे जाते हैं।

  • उद्योग-दिन अवकाश: कुछ क्षेत्रों में कारखानों या कार्यशालाओं में अवकाश होता है ताकि श्रमिक पूजा में भाग ले सकें।

ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व

  • विश्वकर्मा का उल्लेख प्राचीन शास्त्रों में मिलता है — वास्तुशास्त्र और शिल्पशास्त्र में।

  • उनके वंशजों को विभिन्न शिल्प समुदायों (जैसे लोहार, सुनार, बढ़ई आदि) का मूल माना जाता है।

  • यह उत्सव श्रमिकों और कारीगरों के सम्मान और उनके कौशल की महत्ता को रेखांकित करता है।

  • आधुनिक प्रासंगिकता

  • आज के समय में यह दिन औद्योगिक श्रमिकों और तकनीकी कामगारों के लिए सुरक्षा, गुणवत्ता और सुचारु संचालन की कामना का पर्व है।

  • प्रधान मंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (PM Vishwakarma Yojana) जैसी योजनाएँ भी इसी नाम से शुरू की गई हैं।

  • कुछ राज्यों में इसे राजकीय अवकाश या औद्योगिक अवकाश भी घोषित किया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि श्रम, निर्माण और मानव कौशल की महत्ता को उजागर करने वाला त्योहार है। यह हमें याद दिलाता है कि बिना कारीगरी, बिना औजारों और बिना तकनीकी ज्ञान के समाज की प्रगति अधूरी है। इस दिन श्रमिकों और कारीगरों के सम्मान तथा उनके कौशल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।


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