: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई हाई कोर्ट किसी जमानत याचिका को केवल इस आधार पर खारिज नहीं कर सकता कि शीर्ष अदालत ने नई अर्जी दायर करने की अनुमति नहीं दी है।
Admin
Sat, Feb 15, 2025
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई हाई कोर्ट किसी जमानत याचिका को केवल इस आधार पर खारिज नहीं कर सकता कि शीर्ष अदालत ने नई अर्जी दायर करने की अनुमति नहीं दी है।
कोर्ट ने दोहराया कि पहले की जमानत अर्जी खारिज होने या दी गई जमानत रद्द होने के बाद नई जमानत अर्जी दाखिल करना एक अधिकार है।
न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा, ''एक बार पहले की जमानत अर्जी खारिज हो जाने के बाद या यदि मंजूर हो गई हो और उसके बाद रद्द कर दी गई हो, तो नई जमानत अर्जी दाखिल करना अधिकार का मामला है और केवल इस आधार पर कि शीर्ष अदालत ने नई जमानत अर्जी दाखिल करने की अनुमति नहीं दी थी, उच्च न्यायालय द्वारा जमानत अर्जी खारिज करना उचित नहीं था।''
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