हम सबको जोड़ती है हिन्दू पहचान : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत : संघ किसी की प्रतिक्रिया या विरोध में शुरू हुआ संगठन नहीं है, न ही उसकी किसी से प्रतिस्पर्धा है।
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Jan 2, 2026
हम सबको जोड़ती है हिन्दू पहचान : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में समाज को एकजुट रहने का आह्वान
भोपाल। हमारे मत-पंथ, सम्प्रदाय, भाषा और जातियाँ भिन्न हो सकती हैं, लेकिन हिन्दू पहचान हम सभी को जोड़ती है। हमारी संस्कृति, धर्म और पूर्वज समान हैं। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम में मध्यभारत प्रान्त के संघचालक श्री अशोक पांडेय एवं भोपाल विभाग के संघचालक श्री सोमकान्त उमालकर मंचासीन रहे।
सरसंघचालक डॉ. भागवत जी ने कहा कि हिन्दू केवल एक धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि स्वभाव और प्रकृति है। धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति या रिलीजन नहीं, बल्कि वह आचरण है जो सबको साथ लेकर चले, सबका उत्थान करे और समाज में सद्भाव बनाए। उन्होंने कहा कि जब-जब समाज अपने हिन्दू बोध को भूलता है, तब-तब संकट आता है। इसलिए हिन्दू समाज को जागृत और संगठित करना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी की प्रतिक्रिया या विरोध में शुरू हुआ संगठन नहीं है, न ही उसकी किसी से प्रतिस्पर्धा है। संघ का उद्देश्य गुणसम्पन्न, संगठित और राष्ट्रनिष्ठ समाज का निर्माण करना है। संघ की तुलना किसी अन्य संगठन से नहीं की जा सकती, क्योंकि यह व्यक्ति निर्माण की एक अनूठी पद्धति है।
डॉ. भागवत जी ने बताया कि संघ ने प्रारंभ से ही ‘प्रेशर ग्रुप’ बनने के बजाय सम्पूर्ण समाज को संगठित करने का मार्ग चुना। समाज ही राष्ट्र का भाग्य निर्धारित करता है; नेता और नीतियाँ तभी सफल होती हैं जब समाज सशक्त होता है। उपेक्षा और विरोध के बावजूद संघ के स्वयंसेवकों ने त्याग और समर्पण के साथ कार्य किया, जिसके परिणामस्वरूप आज समाज का विश्वास संघ के प्रति बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न मत-संप्रदायों में अनेक सज्जन शक्तियाँ कार्य कर रही हैं। इन सबके बीच समन्वय और सहयोग का वातावरण बनाना ही संघ का कार्य है।
अंत में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने समाज और राष्ट्र की उन्नति हेतु पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध और नागरिक अनुशासन—का आह्वान किया और सभी प्रमुख जनों से इन विषयों पर सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
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