दीपावली पर्व की शुरुआत : धनतेरस और धन्वंतरि जयंती का उद्देश्य “धन” और “धर्म” दोनों का संतुलन है — समृद्धि के साथ स्वस्थ जीवन की प्राप्ति।
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Oct 18, 2025
🌕 धनतेरस का उद्देश्य एवं महत्व
धनतेरस (Dhanteras) दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है। यह कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाई जाती है।
इस दिन “धन” (समृद्धि) और “आरोग्य” (स्वास्थ्य) दोनों की प्राप्ति के लिए भगवान धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
🔹 धनतेरस मनाने का उद्देश्य
आरोग्य और आयु की कामना — यह दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि को समर्पित है, जो समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
समृद्धि और वैभव की प्राप्ति — इस दिन नए बर्तन, सोना-चांदी, वाहन या वस्त्र खरीदना शुभ माना जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा — इस दिन दीप जलाने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
🌿 धन्वंतरि जयंती का उद्देश्य
भगवान धन्वंतरि, जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, को “आयुर्वेद के जनक” कहा जाता है।
धनतेरस के दिन ही धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।🔹 धन्वंतरि जयंती का उद्देश्य
शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए — यह दिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।
आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के सम्मान के रूप में — यह दिन चिकित्सा और स्वास्थ्य कर्मियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन भी है।
अमृतत्व और संतुलन की प्राप्ति — यह दर्शाता है कि जीवन में संतुलित आहार, दिनचर्या और संयम से ही अमृत समान स्वास्थ्य पाया जा सकता है।
🪔 विधिपूर्वक पूजा करने के लाभ
🔹 धनतेरस पूजन विधि
प्रातः स्नान कर घर की सफाई करें और मुख्य द्वार पर दीप जलाएँ।
शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर तांबे या मिट्टी का दीपक जलाकर भगवान धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी का पूजन करें।
गायत्री मंत्र, महालक्ष्मी स्तोत्र या धन्वंतरि मंत्र का जाप करें —
👉 “ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय नमः।”धातु (चांदी, तांबा, सोना या बर्तन) खरीदना शुभ माना जाता है।
🔹 लाभ
✅ घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
✅ रोग और कष्टों से रक्षा होती है।
✅ सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
✅ व्यवसाय में उन्नति और स्थिरता आती है।
✅ दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं।
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