पहली बार अपराध करने वालों के लिए राहतभरी खबर : हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पहली बार दोषी ठहराए गए अपराधियों को जेल भेजना अनिवार्य नहीं है।
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Sep 3, 2025
📰 पहली बार अपराध करने वालों के लिए राहतभरी खबर
चंडीगढ़ – पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पहली बार दोषी ठहराए गए अपराधियों को जेल भेजना अनिवार्य नहीं है।
मामला 2016 की एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को 2019 में आईपीसी की धारा 148 और 323 के तहत एक साल की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट की जस्टिस मनीषा बत्रा ने इस पर निर्णय देते हुए कहा कि अपराधी परिवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 और 6 तथा सीआरपीसी की धारा 360 और 361 का उद्देश्य यह है कि कम गंभीर अपराध करने वाले पहले अपराधियों को जेल न भेजा जाए।
अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में अदालतों को इन प्रावधानों की उदार व्याख्या करनी चाहिए, ताकि समाज में सुधार की गुंजाइश बनी रहे और अपराधी को दोबारा अपराध की ओर बढ़ने से रोका जा सके।
⚖️ जनहित का संदेश
यह फैसला समाज को यह सीख देता है कि पहली गलती सुधार का मौका है, सजा का नहीं। छोटे अपराधों में जेल की सजा से अपराधी के जीवन पर बुरा असर पड़ता है, जबकि परिवीक्षा जैसी व्यवस्था से उसे दोबारा समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलता है।
👉 यह निर्णय न सिर्फ न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि समाज में सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) को भी मजबूती देता है।
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