मानवाधिकारों की रक्षा और पुलिस थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की : थानों में सीसीटीवी की कमी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Sep 5, 2025
📰 थानों में सीसीटीवी की कमी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश
नई दिल्ली।
पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कमी और हिरासत में हो रही मौतों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने एक समाचार पत्र की एक खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुरुवार को यह आदेश दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं और इसके लिए पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
📌 पृष्ठभूमि
– 4 सितंबर को दैनिक भास्कर ने राजस्थान में पिछले 8 महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतों की खबर प्रकाशित की थी।
– रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई थानों में सीसीटीवी कैमरे ही नहीं लगे हैं, और जहाँ लगे हैं, वहाँ रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होती।
📌 सुप्रीम कोर्ट का पुराना आदेश (2020)
– दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को आदेश दिया था कि सभी पुलिस थानों और जांच एजेंसियों के दफ्तरों (CBI, ED, NIA सहित) में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाए जाएँ।
– यह भी निर्देश दिया गया था कि थानों के प्रवेश-द्वार, मुख्य-द्वार, हवालात, गलियारे, लॉबी, स्वागत कक्ष और हवालात के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगना अनिवार्य है।
– कैमरों में नाइट विज़न, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा भी होना चाहिए।
एक समाचार पत्र की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा –
“हम स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दे रहे हैं ताकि मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाओं को रोका जा सके और पुलिस हिरासत में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।”
👉 यह आदेश न केवल पुलिस हिरासत में मौतों की जांच को मजबूती देगा, बल्कि आम नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा और पुलिस थानों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।
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