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शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय, जहांगीराबाद, भोपाल में : जीएसटी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का सफल आयोजन

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Oct 16, 2025

जीएसटी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का सफल आयोजन

भोपाल, 16 अक्टूबर 2025।
शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय, जहांगीराबाद, भोपाल में आज “जीएसटी का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव” विषय पर एक राष्ट्रीय वेबीनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जीएसटी के व्यावहारिक, आर्थिक और संरचनात्मक प्रभावों पर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक डॉ. जी. एल. मालवीय द्वारा वेबीनार की रूपरेखा प्रस्तुत करने के साथ हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने प्रेरक उद्बोधन देते हुए कहा कि “जीएसटी भारत की कर प्रणाली में एक ऐतिहासिक सुधार है, जिसने एक राष्ट्र–एक कर–एक बाजार की अवधारणा को साकार किया।” उन्होंने बताया कि जीएसटी ने पारदर्शिता बढ़ाने के साथ राजस्व संग्रहण को भी सुदृढ़ किया है।

मुख्य अतिथि डॉ. मथुरा प्रसाद, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग (नर्मदापुरम संभाग), ने कहा कि “जीएसटी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को संगठित स्वरूप दिया है और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है।” उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक विमर्श छात्रों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं।

मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) कपिल देव शर्मा (पूर्व प्राचार्य, लॉर्ड बुद्ध इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, कोटा, राजस्थान) ने जीएसटी के व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि “यह प्रणाली केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व संतुलन का मजबूत माध्यम बनी है।”

द्वितीय मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) अशोक अग्रवाल (पूर्व डीन एवं विभागाध्यक्ष, वाणिज्य संकाय, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर) ने कहा कि “जीएसटी ने छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए एक पारदर्शी व सरल कर संरचना प्रस्तुत की है। यद्यपि प्रारंभिक दौर में चुनौतियाँ आईं, पर दीर्घकाल में यह भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का आधार स्तंभ सिद्ध होगी।”

वेबीनार में देश भर से 71 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 9 विद्वानों — डॉ. अनिल कुमार, डॉ. निकिता गोस्वामी, डॉ. शैलेंद्र सोलंकी, डॉ. अफसर अली, डॉ. घनश्याम चौकसे, डॉ. नीलेश मिश्रा, डॉ. जया शर्मा, डॉ. गीतांजलि शर्मा एवं डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव — ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. जी. एल. मालवीय, सह-संयोजक डॉ. राजीव चौबे एवं डॉ. राकेश कुमार राणा थे।
ऑर्गेनाइजिंग समिति में डॉ. संगीता गौर एवं डॉ. अर्पणा कड़ू,
तकनीकी समिति में श्री हिरदेश पाटीदार एवं श्रीमती हर्षलता सोनी,
तथा पब्लिकेशन समिति में डॉ. राजीव चौबे, ले. आराधना धुर्वे, श्रीमती लीना चौकसे एवं डॉ. रोशनी की सक्रिय भूमिका रही।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिव्या सेप्टा एवं डॉ. अंशुल शर्मा ने उत्कृष्ट रूप से किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. मुक्तेश कुमार तिवारी द्वारा किया गया।

अंत में प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने वेबीनार की सफलता पर सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि “ऐसे शैक्षणिक आयोजन न केवल विद्यार्थियों के ज्ञान को विस्तार देते हैं, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी योगदान करते हैं।”

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