वर्तमान समय में भी गुरुजी के विचार प्रासंगिक हैं। : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर की जयंती पर विशेष
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Feb 19, 2026
Rashtriya Swayamsevak Sangh के द्वितीय सरसंघचालक Madhav Sadashivrao Golwalkar की जयंती पर विशेष
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ‘गुरुजी’ की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर संघ के स्वयंसेवकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया।
माधवराव गोलवलकर का जन्म 19 फरवरी 1906 को हुआ था। वे वर्ष 1940 में संघ के संस्थापक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार के निधन के पश्चात सरसंघचालक बने और 1973 तक इस दायित्व का निर्वहन किया। उनके नेतृत्व में संघ का कार्य देश के विभिन्न प्रांतों में व्यापक रूप से विस्तार हुआ तथा संगठनात्मक संरचना को सुदृढ़ आधार मिला।
गुरुजी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, संगठन शक्ति और चरित्र निर्माण पर विशेष बल दिया। उनका मानना था कि संगठित, संस्कारित और जागरूक समाज ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होता है। उनके मार्गदर्शन में अनेक प्रेरणादायी विचार सामने आए, जिन्होंने लाखों स्वयंसेवकों को समाज जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
जयंती कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी गुरुजी के विचार प्रासंगिक हैं। सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव के विषय में उनका दृष्टिकोण युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्र प्रार्थना के साथ राष्ट्र सेवा के संकल्प को दोहराया गया।
विज्ञापन