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पत्रकारों को चरणबद्ध ढंग से गढ़ते थे मामाजी : मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की जयंती पर विश्व संवाद केंद्र में विशेष व्याख्यान का आयोजन

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Oct 7, 2025

पत्रकारों को चरणबद्ध ढंग से गढ़ते थे मामाजी

मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी की जयंती पर विश्व संवाद केंद्र में विशेष व्याख्यान का आयोजन

भोपाल। प्रख्यात पत्रकार-संपादक मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी पत्रकारों को चरणबद्ध ढंग से गढ़ते थे। वे केवल पत्रकारिता ही नहीं, जीवन के संस्कार भी सिखाते थे। उन्होंने अपने जीवन से पत्रकारिता और लोक आचरण दोनों के आदर्श प्रस्तुत किए। यह विचार वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने मामाजी की जयंती के अवसर पर विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम 7 अक्टूबर को शिवाजी नगर स्थित माणिकचंद्र वाजपेयी सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में गिरीश जोशी उपस्थित रहे तथा अध्यक्षता लाजपत आहूजा ने की।

मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी और पत्रकारिता का वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर वक्तव्य देते हुए गिरीश उपाध्याय ने कहा कि मामाजी पत्रकार को समाचार पत्र के हर पहलू की जानकारी देने में विश्वास रखते थे। उन्होंने सबसे पहले उन्हें समाचार पत्र के तकनीकी कार्यों से जोड़ा, इसके बाद इंदौर के अनंत चतुर्दशी चल समारोह के कवरेज की जिम्मेदारी सौंपी। इससे शहर की संस्कृति और जनमानस को निकट से समझने का अवसर मिला। उपाध्याय ने बताया कि वे शिक्षक बनने के लिए भोपाल आए थे, लेकिन बाद में ‘स्वदेश’ से जुड़कर मामाजी के सान्निध्य में पत्रकारिता सीखी। उनकी पत्रकारिता पर मामाजी की गहरी छाप रही।

इस अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव एवं लेखक गिरीश जोशी ने कहा कि भारत में पत्रकारिता को गढ़ने वाले महापुरुषों में मामाजी माणिकचंद्र वाजपेयी का नाम अग्रणी है। उनका ध्येय सदैव राष्ट्रहित रहा। उन्होंने कभी भी पत्रकारिता के मूल्यों से समझौता नहीं किया और मानवीय मूल्यों को भी बढ़ावा दिया। मामाजी समाचार पत्र के प्रूफ रीडिंग से लेकर संपादन तक सभी कार्य स्वयं करते थे। वे दूरदर्शी पत्रकार थे जिन्होंने आपातकाल से पूर्व ही इसकी आशंका व्यक्त कर दी थी। उन्होंने स्वदेशी के महत्व को भी समय रहते रेखांकित किया और बताया कि स्वदेशी केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं बल्कि एक विचार है।

लाजपत आहूजा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि मामाजी जमीनी व्यक्तित्व के धनी थे। भिंड में निजी महाविद्यालय के संचालन से उन्होंने पत्रकारिता की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से निकट संबंध था। अटल जी उन्हें एक ध्येयनिष्ठ संपादक के रूप में अत्यधिक सम्मान देते थे। मामाजी ने पत्रकारिता में नैतिकता के मापदंड स्थापित किए। उन्होंने एक बार सेक्स स्कैंडल में फंसे नेता का चित्र छापने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि समाचार पत्र परिवारों में पढ़े जाते हैं। वे निस्पृह और सिद्धांतनिष्ठ संपादक थे।

कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि जयंती के प्रसंग पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। साथ ही विश्व संवाद केंद्र के विशेषांक ‘कन्वर्जन का खेल : निशाने पर जनजातीय’ का विमोचन भी किया गया, जिसका संपादन युवा पत्रकार एवं लेखक सुदर्शन व्यास ने किया है। कार्यक्रम का संचालन युवा पत्रकार अदिति रावत ने किया तथा आभार ज्ञापन न्यास के सचिव लोकेन्द्र सिंह ने किया।


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