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बाबा साहेब की 135वीं जयंती के अवसर पर RSS की तुलसी बस्ती स्थित भगत सिंह शाखा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया

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भेल एवं प्रज्ञा प्रवाह मध्यप्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित : सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता ही बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन का सार : अजातशत्रु श्रीवास्तव

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Aug 23, 2025

सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता ही बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन का सार : अजातशत्रु श्रीवास्तव

भोपाल। बाबा साहेब अंबेडकर के जीवन का सार तीन मूल्यों में निहित है – सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता। ये प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए अनिवार्य हैं।” यह बात सेवानिवृत्त आईएएस श्री अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कही। वे ‘संघर्ष महामानव’ (लेखक: श्री रमेश पतंगे) पुस्तक पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, बाबूलाल गौर शासकीय महाविद्यालय,
भेल एवं प्रज्ञा प्रवाह मध्यप्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

श्री श्रीवास्तव ने कहा कि बाबा साहेब के निधन को 70 वर्ष से अधिक हो गए हैं, किंतु उनकी विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायक है। उनके जीवन से तीन प्रमुख सीख मिलती हैं – संघर्ष, सम्यक शिक्षा और सामाजिक दृष्टिकोण। यदि हम बेहतर इंसान बनना चाहते हैं तो इन तीनों को अपनाना आवश्यक है।

प्रो. अशोक शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के संघर्षपूर्ण जीवन में उनकी पत्नी रमाबाई अंबेडकर और महिला शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि रमाबाई ने हर परिस्थिति में जीवनसंगिनी ही नहीं, बल्कि प्रेरणास्रोत के रूप में भी उनका साथ दिया। महिलाओं के शिक्षा, समानता और अधिकारों के प्रति डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण को आकार देने में भी यह योगदान अहम रहा।

श्री मथुरा प्रसाद (अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग) ने कहा कि दलित समाज की पिछड़ी स्थिति के लिए केवल सामाजिक परंपराएं ही नहीं, बल्कि मुगलों और अंग्रेजों की नीतियां भी जिम्मेदार थीं। उन्होंने बताया कि बाबा साहेब के पिता ने उन्हें धर्म, संस्कृति और संस्कार की शिक्षा दी थी। बाबा साहेब ने राजनीतिक और सामाजिक अधिकारिता के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। अंग्रेजों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को तोड़कर संसाधनों का शोषण किया और ब्रिटेन को समृद्ध बनाया। उन्होंने कहा कि “बाबा साहेब का आर्थिक चिंतन आज भी उतना ही प्रासंगिक है।”

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य श्री संजय जैन, भोपाल विभाग संयोजक श्री भूपेंद्र सिंह जाटव, प्रज्ञा प्रवाह प्रांत कार्यकारिणी सदस्य श्री रीतेश शर्मा, डॉ. सविता भदोरिया, श्री अभिषेक शर्मा (युवा आयाम प्रमुख) सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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