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यह आयोजन केवल पथ संचलन नहीं, बल्कि शताब्दी वर्ष के उस संदेश का प्रतीक : भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर “श्रेणी मिलन पथ संचलन” — एकता, समरसता और राष्ट्रभाव का प्रेरक संगम

Ashwani Kumar Sinha

Sun, Oct 12, 2025

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर “श्रेणी मिलन पथ संचलन” — एकता, समरसता और राष्ट्रभाव का प्रेरक संगम

भोपाल, रविवार।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आज भोपाल का तात्या टोपे स्टेडियम अनुशासन, उत्साह और राष्ट्रभाव के रंग में रंग गया। “श्रेणी मिलन पथ संचलन” के अवसर पर स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियां, घोष वादन की गूंज और कदमताल की समरस लय ने सम्पूर्ण वातावरण को राष्ट्रमय बना दिया।

यह आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भोपाल विभाग द्वारा संयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय रोहित आर्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सह-क्षेत्र प्रचारक श्री प्रेमशंकर ने मुख्य वक्ता के रूप में संघ के कार्य, उद्देश्य और उसकी समाज में भूमिका पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। मंचासीन अतिथियों में प्रांत संघचालक माननीय अशोक पांडे एवं विभाग संघचालक माननीय सोमकांत उमालकर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

अनुशासन और संगठन का अद्भुत प्रदर्शन
तात्या टोपे स्टेडियम तीन हजार से अधिक स्वयंसेवकों की सहभागिता से गूंज उठा। चिकित्सा, शिक्षा, विधि, प्रशासन, उद्योग, कृषि, कला, खेलकूद तथा मातृशक्ति जैसे समाज के विविध क्षेत्रों से स्वयंसेवक इस आयोजन का हिस्सा बने। सुसज्जित गणवेश में सुसंगठित श्रेणियों का संचलन, दंड प्रदर्शन और घोष की तालबद्ध स्वर लहरियों ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया जिसने राष्ट्र की एकता, अनुशासन और स्वाभिमान को सजीव रूप में सामने रखा।

मुख्य अतिथि का उद्बोधन : अनुशासन में निहित राष्ट्रशक्ति
मुख्य अतिथि श्री रोहित आर्य ने कहा कि संघ केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज में आत्मीयता, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक है। संघ के माध्यम से व्यक्ति में चरित्र और समाज में समरसता का निर्माण हुआ है, यही राष्ट्र के उत्थान की आधारशिला है।

मुख्य वक्ता श्री प्रेमशंकर जी के विचार : व्यक्ति से राष्ट्र तक निर्माण की प्रक्रिया
श्री प्रेमशंकर जी ने पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन और उनके द्वारा स्थापित संघ के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संघ का जन्म केवल संगठन निर्माण के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के चरित्र निर्माण के लिए हुआ। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र तक एक सतत प्रवाह की तरह चलता है।

गुरुजी के आदर्शों का स्मरण
उन्होंने द्वितीय सरसंघचालक परम पूज्य गुरुजी माधवराव गोलवलकर के नेतृत्व काल का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुजी ने संघ को केवल विचार नहीं, बल्कि जीवंत राष्ट्रशक्ति के रूप में स्थापित किया। उनके मार्गदर्शन में संघ का विस्तार शिक्षा, संस्कृति, ग्रामविकास और सेवा जैसे क्षेत्रों तक पहुँचा।

समरसता और पंच परिवर्तन का संदेश
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि समरसता, एकता और समानता ही राष्ट्रशक्ति के मूल स्तंभ हैं। संघ सिखाता है कि समाज का कोई भी अंग छोटा या बड़ा नहीं होता, सबकी सहभागिता ही सच्चे राष्ट्रनिर्माण का प्रतीक है। उन्होंने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के सूत्र— व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व में सकारात्मक परिवर्तन— को आज के समय का पथप्रदर्शक बताया।

शताब्दी वर्ष का ऐतिहासिक अध्याय
यह आयोजन केवल पथ संचलन नहीं, बल्कि शताब्दी वर्ष के उस संदेश का प्रतीक बना जिसने एक साथ एकता, अनुशासन और राष्ट्रीय गौरव को साकार किया। उल्लेखनीय है कि आज के दिन भोपाल विभाग के चालीस से अधिक नगरों में भी पथ संचलन आयोजित हुए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों ने राष्ट्रभाव से ओतप्रोत कदमताल कर एक स्वर में “भारत माता की जय” का घोष किया।

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