भारत को माने, भारत को जाने, भारत के बने और फिर भारत को बनाएं : भोपाल में डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ का विमोचन
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Nov 21, 2025
भोपाल में डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ का विमोचन
भोपाल। सुरुचि प्रकाशन द्वारा रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में भारत की मूल अवधारणा, आत्मगौरव और अध्ययनशील परंपरा पर विस्तृत चर्चा हुई।
विमोचन समारोह में पूर्व उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, ऋतेश्वर जी महाराज, जागरण समूह के समूह संपादक श्री विष्णु त्रिपाठी, सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष श्री राजीव तुली तथा लेखक डॉ. वैद्य उपस्थित रहे।
डॉ. वैद्य ने अपने संबोधन में कहा कि “भारत को माने, भारत को जाने, भारत के बने और फिर भारत को बनाएं
”—यह क्रम राष्ट्र निर्माण की मूल कसौटी है। उन्होंने बताया कि संघ पर होने वाला अनावश्यक विरोध कई बार उसकी स्वीकार्यता बढ़ा देता है। उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2018 में केवल छह दिनों में 378 लोगों ने उनसे मिलने का समय माँगा तथा जॉइन आरएसएस प्लेटफ़ॉर्म पर एक ही महीने में 48,890 लोगों ने स्वयंसेवक बनने का अनुरोध किया।
भारत की सांस्कृतिक अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत में विविधता मूल संस्कृति की अभिव्यक्ति है, उसका विकल्प नहीं। वेलफेयर स्टेट की पाश्चात्य अवधारणा की बजाय भारत की परंपरा समाज-आधारित दायित्व पर आधारित रही है।
समूह संपादक विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि यह पुस्तक अध्ययन, मनन और भाष्य के लिए लिखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की परंपरा एकल मत पर नहीं, बल्कि ज्ञान की अनेक धाराओं पर आधारित है।
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने पुस्तक को “सोए हुए को जगाने वाली कृति” बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भारत के गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य की दिशा दोनों प्रस्तुत करती है।
सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने बताया कि संस्थान आने वाले समय में वॉकिज़्म, पंच परिवर्तन और अन्य गंभीर विमर्शों पर भी नई कृतियाँ प्रकाशित करेगा।
समारोह का संचालन डॉ. साधना बलवटे ने किया तथा अंकुर पाठक ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के साथ हुआ।
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