एम.आर.पी. पर नियंत्रण हेतु नियामक प्राधिकरण की मांग : ग्राहक हितों पर केंद्रित प्रस्ताव—वित्त मंत्री से अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की महत्वपूर्ण बैठक
Ashwani Kumar Sinha
Sun, Dec 7, 2025
अगामी बजट पर विचार-विमर्श: ग्राहक हितों पर केंद्रित प्रस्ताव—वित्त मंत्री से अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली, 29 नवंबर 2025। आगामी केंद्रीय बजट 2026–27 की तैयारियों के बीच आज राजधानी दिल्ली में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। बैठक में ग्राहक हितों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की शुरुआत में संगठन ने हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती हेतु सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण राहत बताया।
A. उपभोक्ता आयोग में लंबित मामलों की समस्या—700 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान की मांग
ग्राहक पंचायत ने बताया कि देशभर में राज्य उपभोक्ता आयोगों की स्थिति चिंताजनक है।
राज्यों द्वारा पर्याप्त बजट, संसाधन, स्टाफ और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध न कराए जाने से उपभोक्ता मामलों के निस्तारण में भारी विलंब हो रहा है।
जहां उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार शिकायतों के समाधान की अधिकतम समय-सीमा 90 दिन है, वहीं अधिकांश मामलों में औसत अवधि दो वर्ष तक पहुँच गई है।
लंबित मामलों का बढ़ता बोझ उपभोक्ताओं में निराशा और व्यवस्था पर अविश्वास पैदा कर रहा है।
पंचायत ने उपभोक्ता आयोगों के सुदृढ़ीकरण, अतिरिक्त बेंचों की स्थापना, आधुनिक आईटी अवसंरचना एवं स्टाफ विस्तार हेतु आगामी बजट में 700 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा।
B. बैंक जमा बीमा—बीमित राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की मांग
बैठक में प्रतिनिधियों ने कहा कि बैंक जमा पर बीमा का प्रीमियम पूरी राशि पर लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा केवल 5 लाख रुपये तक सीमित है।
पंचायत ने इसे उपभोक्ता सुरक्षा के लिए अपर्याप्त बताते हुए दो प्रस्ताव रखे—
बीमित राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाए।
10 लाख से अधिक जमा पर उपभोक्ता की इच्छा अनुसार अतिरिक्त प्रीमियम लेकर सुरक्षा दी जाए।
यह मांग हाल के वर्षों में कई सहकारी और निजी बैंकों में उपभोक्ताओं की जमा राशि संकट में फंसने की घटनाओं को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
C. एम.आर.पी. (Maximum Retail Price) पर नियंत्रण हेतु नियामक प्राधिकरण की मांग
ग्राहक पंचायत ने बैठक में यह गंभीर मुद्दा उठाया कि निर्माता अपनी सुविधा से मनमाने ढंग से एम.आर.पी. तय करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं का शोषण होता है।
संगठन ने स्पष्ट रूप से कहा कि—
आवश्यक वस्तुओं पर पारदर्शी और तर्कसंगत एम.आर.पी. तय करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाए।
एम.आर.पी. निर्धारण के लिए सख्त विनियम बनाए जाएँ और मनमानी को रोका जाए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायण भाई शाह ने क्या कहा
अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायण भाई शाह ने बताया कि संगठन का उद्देश्य उपभोक्ता अधिकारों को अधिक मजबूत बनाना है।
उन्होंने कहा—
“उपभोक्ता आयोगों को संसाधन, बैंक जमा की सुरक्षा तथा एम.आर.पी. नियंत्रण—ये तीनों विषय देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को सीधे प्रभावित करते हैं। उम्मीद है कि सरकार आगामी बजट में इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करेगी।”
वित्त मंत्री के साथ हुई यह बैठक उपभोक्ता हित और आर्थिक पारदर्शिता के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें आगामी केंद्रीय बजट पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन प्रस्तावों को शामिल कर उपभोक्ता अधिकारों को और सशक्त बनाती है।
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