कौन हैं भगवान परशुराम ? : परशुराम जयंती 2025: धर्म, शक्ति और तपस्या के प्रतीक भगवान परशुराम की जयंती आज, जानें महत्व और पूजन विधि
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Apr 30, 2025
परशुराम जयंती 2025: धर्म, शक्ति और तपस्या के प्रतीक भगवान परशुराम की जयंती आज, जानें महत्व और पूजन विधि
भोपाल।
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष परशुराम जयंती 29 अप्रैल 2025, मंगलवार को पूरे श्रद्धा-भाव से मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार यह तिथि 29 अप्रैल को शाम 5:31 बजे से प्रारंभ होकर 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 बजे तक रहेगी, किंतु प्रदोष काल में तृतीया तिथि होने के कारण 29 अप्रैल को ही परशुराम जयंती मनाई जाएगी।
कौन हैं भगवान परशुराम?
भगवान परशुराम, ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। वे भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और उन्होंने शिवजी से परशु (कुल्हाड़ी) प्राप्त की थी, जिसके कारण उन्हें परशुराम कहा गया। परशुराम जी को चिरंजीवी माना गया है और ऐसा विश्वास है कि वे आज भी पृथ्वी पर जीवित हैं। जब भी धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होगी, वे पुनः प्रकट होकर अधर्म का नाश करेंगे।
पूजन विधि एवं व्रत का महत्व
परशुराम जयंती के दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। पूजा स्थल को स्वच्छ करके भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। उन्हें चंदन, पुष्प, फल, नारियल, मिठाई, अक्षत आदि अर्पित किए जाते हैं। विशेष रूप से ‘जमदग्नि सुतो वीर क्षत्रियान्तकर प्रभो। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं कृपया परमेश्वर।।’ मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दिया जाता है।
शुभ योगों का विशेष संयोग
इस वर्ष परशुराम जयंती के दिन त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को और भी अधिक शुभ बनाता है। मान्यता है कि इन योगों में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करती है।
सामाजिक संदेश और शिक्षा
भगवान परशुराम का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, धर्म की रक्षा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। वे सभी वर्गों के कल्याण की बात करते हैं और उनका जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
समापन
परशुराम जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह धर्म, शक्ति, तपस्या और समानता का संदेश देने वाला दिवस है। इस दिन उपवास व पूजा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
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