अतिथि ने शाखा के माध्यम से संघ को समझने का आग्रह किया। : संघ शताब्दी वर्ष पर आकृति बस्ती, नेहरू नगर में हुआ पथ संचलन
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Oct 13, 2025
संघ शताब्दी वर्ष पर आकृति बस्ती, नेहरू नगर में हुआ पथ संचलन
श्री सुदेश शांडिल्य जी महाराज एवं श्री गिरीश जोशी जी के प्रेरक उद्बोधन से स्वयंसेवक हुए प्रेरित
भोपाल, 12 अक्टूबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज आकृति बस्ती, नेहरू नगर में पथ संचलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ करुणाधाम आश्रम से हुआ, जिसकी अध्यक्षता एवं आशीर्वचन परम श्रद्धेय श्री सुदेश शांडिल्य जी महाराज ने प्रदान किए।
पूज्यनीय गुरुजी श्री शांडिल्य जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कलयुग में संघ शक्ति ही राष्ट्र की रक्षा कर सकती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र की सच्ची सेवा वही कर सकता है, जिसके चित्त में शुद्धि और समर्पण की भावना हो। उन्होंने समाज में बढ़ती अधिकार की अपेक्षा और घटते दायित्वबोध पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिक अनुशासन की आज अत्यंत आवश्यकता है।
गुरुजी ने यह भी कहा कि संघ के स्वयंसेवक लोकेषणा, वितृष्णा और पुत्रैषणा से दूर रहते हैं, और जब तक व्यक्ति अपने विकारों पर विजय प्राप्त नहीं करता, तब तक वह राष्ट्र के लिए उपयोगी सिद्ध नहीं हो सकता। उन्होंने सभी को शाखा के माध्यम से संघ को समझने का आग्रह किया।



कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री गिरीश जोशी जी, प्रांत सह संपर्क प्रमुख, ने संघ की यात्रा, उद्देश्यों एवं राष्ट्र के प्रति संघ के योगदान पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने बताया कि परम पूज्यनीय डॉक्टर हेडगेवार जी का राष्ट्रप्रेम और हिंदू समाज के प्रति चिंतन ही संघ की स्थापना का आधार रहा।
श्री जोशी जी ने संघ के चार चरणों की यात्रा, छह पीढ़ियों के अमूल्य योगदान और पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में शाखा से होने वाले सकारात्मक परिवर्तन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
बौद्धिक सत्र के पश्चात स्वयंसेवकों ने करुणाधाम आश्रम से प्रारंभ होकर आकृति गार्डन, गोमती नगर, आकाश नगर एवं नया बसेरा से होते हुए पुनः आश्रम तक पथ संचलन किया। अनुशासन, एकता और समरसता का यह दृश्य समाज के लिए प्रेरणादायक रहा। मार्ग में समाज के नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में समाज की अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों ने सहभागिता की। विशेष रूप से पूर्व राज्यपाल एवं प्रदेश संगठन मंत्री श्री कप्तान सिंह सोलंकी जी ने पूर्ण गणवेश में उपस्थित होकर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।
विज्ञापन