जनता के अधिकारों की रक्षा और यातायात नियमों के निष्पक्ष पालन की दिशा : सिर्फ शराब की गंध से नशे की पुष्टि नहीं : हाई कोर्ट
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Sep 9, 2025
सिर्फ शराब की गंध से नशे की पुष्टि नहीं : हाई कोर्ट
नैनीताल, उत्तराखंड –
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शराब की गंध या शक के आधार पर किसी वाहन चालक को नशे में नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि जब तक ब्लड टेस्ट या ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट से यह प्रमाणित न हो कि चालक के शरीर में शराब की मात्रा कानूनी सीमा से अधिक है, तब तक उस पर "नशे में वाहन चलाने" का आरोप सही नहीं ठहराया जा सकता।
कानून के अनुसार, किसी व्यक्ति के शरीर में 100 मिलीलीटर खून में 30 मिलीग्राम से अधिक शराब पाए जाने पर ही यह माना जाता है कि वह नशे की हालत में है।
आमजन के लिए संदेश
सिर्फ गंध या शक पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
वैज्ञानिक जाँच (ब्लड/ब्रीथ टेस्ट) अनिवार्य है।
निर्दोष चालकों को अनावश्यक परेशान करने से बचाने की दिशा में यह आदेश अहम है।
साथ ही, वाहन चालकों को भी यह समझना चाहिए कि तय सीमा से अधिक शराब पीकर गाड़ी चलाना गंभीर अपराध है।
यह फैसला आम जनता के अधिकारों की रक्षा और यातायात नियमों के निष्पक्ष पालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक कदम माना जा रहा है।
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