कानून का उद्देश्य आर्थिक रूप से असहाय जीवनसाथी की रक्षा करना है, न कि : पत्नी की संपत्ति और आय होने पर पति से गुज़ारा भत्ता नहीं — मद्रास हाईकोर्ट
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Aug 25, 2025
पत्नी की संपत्ति और आय होने पर पति से गुज़ारा भत्ता नहीं — मद्रास हाईकोर्ट
चेन्नई | न्याय संवाददाता
मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पत्नी के पास स्वयं की पर्याप्त संपत्ति और स्थायी आय के स्रोत मौजूद हैं, तो पति पर गुज़ारा भत्ता (maintenance) देने का बोझ नहीं डाला जा सकता।
मामला क्या था?
एक दंपति के बीच तलाक की कार्यवाही चल रही थी।
पत्नी ने अंतरिम गुज़ारा भत्ता की मांग करते हुए कहा कि पति को तलाक की कार्यवाही लंबित रहने तक उसकी आर्थिक ज़रूरतें पूरी करनी चाहिए।
पारिवारिक न्यायालय (Family Court) ने इस पर आदेश देते हुए पति को प्रति माह ₹30,000 अंतरिम भत्ता देने का निर्देश दिया।
पति की आपत्ति
पति ने इस आदेश को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसका तर्क था कि पत्नी के पास अपनी कई अचल संपत्तियां हैं, जिनसे उसे नियमित किराये की आय प्राप्त होती है। इसके अलावा उसके पास पर्याप्त साधन हैं, जिससे वह एक आरामदायक जीवन व्यतीत कर सकती है। ऐसे में, उस पर अतिरिक्त गुज़ारा भत्ता देना अनुचित है।
हाईकोर्ट का निर्णय
न्यायमूर्ति ने सुनवाई करते हुए कहा—
पारिवारिक न्यायालय ने तथ्यों की अनदेखी करते हुए गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया।
पत्नी को संपत्ति से पर्याप्त आय प्राप्त हो रही है, अतः वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है।
कानून का उद्देश्य आर्थिक रूप से असहाय जीवनसाथी की रक्षा करना है, न कि सक्षम व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुँचाना।
आदेश
इस आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि पति को अंतरिम गुज़ारा भत्ता देने की बाध्यता नहीं होगी।
👉 यह फैसला उन मामलों के लिए महत्वपूर्ण नज़ीर है, जहाँ पत्नी स्वयं पर्याप्त संपत्ति व आय की मालिक हो और केवल तलाक की प्रक्रिया लंबी खिंचने के कारण पति पर अनुचित आर्थिक बोझ डालना चाहती हो।
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