: नकारात्मकता से सकारात्मकता
Admin
Sat, Sep 9, 2023
हमारे सामने अगर स्थिति नकारात्मक हो और हमारा विचार भी नकारात्मक हो, तो उसका परिणाम नकारात्मक आएगा। मगर परिस्थिति नकारात्मक हो और अपना विचार अगर सकारात्मक हो, तो उसका परिणाम सकारात्मक आएगा। परिस्थिति कैसी भी हो, हमारे सकारात्मक विचार ही हमें सकारात्मक परिणाम देते हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज जब आगरा में नजर कैद में थे, तब ऐसी कोई भी परिस्थिति नहीं थी, कि वे वहां से छूट सके। चारों ओर मुगलों का राज्य था । परिस्थिति पूरी नकारात्मक थी। फिर भी छत्रपति शिवाजी महाराज के मन में सकारात्मक विचार था। मैं इस परिस्थिति से भी छुट सकता हूं। इस सकारात्मक विचार से ही वो वहां से छूट गए। परिस्थिति भले कितनी भी नकारात्मक हो, हमें सकारात्मक ही सोचना है।
एक गांव में एक कुआं था। उसमें बिल्कुल पानी नहीं था। उसमें एक घोड़ा गिर जाता है। वह घोड़ा भी वृद्ध था। किसी काम का नहीं था। तब उसके मालिक ने सोचा कि अगर इस कुएं में के ऊपर से मिट्टी डाल दें, तो यह कुआं भी भर जाएगा, और साथ में इस घोड़े का भी दफ़न होगा। इसलिए उसने चार मजदूर काम पर लगाये और कुएं में मिट्टी डालना शुरू किया । जैसे उस कुएं के अंदर नीचे मिट्टी आई, तब घोड़े ने सोचा मेरा मालिक कितना अच्छा है। वह कुएं में मिट्टी डालकर मुझे ऊपर ले रहा है। उस घोड़े का मालिक का विचार नकारात्मक था। घोड़े को मारने का था और घोड़े का विचार सकारात्मक था। स्वयं को बचाने का था। इसलिए कुएं में जैसे-जैसे मिट्टी भरने लगी, वैसा घोड़ा ऊपर आया और बच गया। यहां मलिक का विचार नकारात्मक था। मगर घोड़े का विचार सकारात्मक था।
नकारात्मकता को सकारात्मकता में बदलना यह कोई छोटी बात नहीं। यह वही कर सकता है, जिसे अपनी शक्ति का पता हो। अपनी विशेषता पता हो। अपनी विशेषता से वो बड़े-बड़े बदलाव कर सकता है।
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