आज मेले में देश भक्ति गीत और भजन प्रतियोगिता दोपहर 3 बजे से : ठेंगड़ी जी की जयंती पर भोपाल स्वदेशी मेला में देशी कार्यक्रम
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Nov 10, 2025
दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्म जयंती विशेष : स्वदेशी सोच के शिल्पकार का स्मरण
स्वदेशी जागरण मच के भोपाल स्वदेशी मेले पर देश भक्ति गीत और भजन प्रतियोगिता कार्यक्रम
भोपाल। 10 नवम्बर। दत्तोपंत बापुराव ठेंगड़ी की जन्म जयंती पर आज देशभर में स्वदेशी और राष्ट्रीय आर्थिक नीति के आधार स्तंभ इस महान विचारक को आदर से स्मरण किया जा रहा है। 10 नवम्बर 1920 को वर्धा जिले के आर्वी में जन्मे ठेंगड़ी जी ने युवावस्था में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में सेवा आरंभ की और उसके बाद जीवन भर राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए श्रमिक, किसान तथा स्वदेशी आर्थिक व्यवस्था के लिए निरंतर काम किया।
ठेंगड़ी जी आधुनिक भारत में ऐसे गिने-चुने व्यक्तित्वों में रहे जिन्होंने केवल भाषण नहीं दिए, बल्कि स्थायी जन संगठनों की स्थापना भी की। उन्होंने 23 जुलाई 1955 को भारतीय मजदूर संघ (BMS) की स्थापना की जो आज देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठनों में प्रमुख माना जाता है। इसके बाद उन्होंने किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु भारतीय किसान संघ की स्थापना की तथा 1991 में वैश्विक आर्थिक चुनौती के समय स्वदेशी जागरण मंच का निर्माण किया और स्वावलम्बी अर्थव्यवस्था का प्रखर स्वर बने।
ठेंगड़ी जी का एक अत्यंत प्रेरणादायक प्रसंग यह भी है कि वर्ष 2003 में जब उन्हें पद्म भूषण सम्मान प्रस्तावित हुआ तो उन्होंने यह कहते हुए विनम्रता से अस्वीकार कर दिया कि राष्ट्र में जिन महान सेवकों ने अप्रतिम कार्य किया है, उन्हें पहले उचित सम्मान मिले। यह उनका वैयक्तिक चरित्र, नैतिक ऊँचाई और सच्चाई का प्रत्यक्ष प्रमाण माना जाता है।
आज ठेंगड़ी जी की जयंती पर विभिन्न सामाजिक संगठन, श्रमिक संगठन, शिक्षण संस्थान तथा राष्ट्रवादी मंच स्वदेशी मॉडल के आधार पर MSME, किसान-हित और रोजगार आधारित नीतियों पर चर्चा करते हुए उनके विचारों से प्रेरित नए कार्यक्रम प्रस्तावित कर रहे हैं। यह अवसर केवल स्मरण का नहीं, बल्कि ठेंगड़ी जी की स्वदेशी सोच को व्यवहार में उतारने का समय है, ताकि भारत आत्मनिर्भर, श्रमिक समर्थ और स्थानीय उद्योग सशक्त बने — यही उनके जीवन का मुख्य संदेश रहा।
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