आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर : नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च 2025 को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय का दौरा
Ashwani Kumar Sinha
Sun, Mar 30, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च 2025 को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय का दौरा किया, जो प्रधानमंत्री के रूप में उनका पहला संघ मुख्यालय दौरा था। इस अवसर पर उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के स्मृति मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने 34 मिनट के संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आरएसएस की 100 वर्षों की यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि "राष्ट्रीय चेतना के लिए जो विचार 100 साल पहले संघ के रूप में बोया गया, वो आज महान वट वृक्ष के रूप में दुनिया के सामने है।" उन्होंने संघ को भारत की अमर संस्कृति का अक्षयवट बताते हुए कहा कि यह निरंतर भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने भक्ति आंदोलन और संतों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि "मध्यकाल के कठिन समय में हमारे संतों ने भक्ति के विचारों से राष्ट्रीय चेतना को नई ऊर्जा दी।" उन्होंने गुरु नानक देव, कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, संत तुकाराम, संत रामदेव, संत ज्ञानेश्वर जैसे महान संतों के योगदान की प्रशंसा की।
सेवा के महत्व पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम देव से देश, राम से राष्ट्र का मंत्र लेकर चल रहे हैं।" उन्होंने आरएसएस के विभिन्न सेवा कार्यों की प्रशंसा की, जो सीमावर्ती गांवों, पहाड़ी और वन क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से किए जा रहे हैं। उन्होंने वनवासी कल्याण संघ, एकल विद्यालय, सांस्कृतिक जागरण और सेवा भारती जैसे संगठनों के माध्यम से वंचितों और गरीबों की सेवा की सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने माधव नेत्रालय के एक्सटेंशन बिल्डिंग की आधारशिला रखी और कहा कि "जीवन में दृष्टि ही दिशा देती है।" उन्होंने विदर्भ के महान संत गुलाबराव महाराज का उल्लेख किया, जिन्हें प्रज्ञा चक्षु कहा जाता था, और जिन्होंने दृष्टिहीन होने के बावजूद कई पुस्तकें लिखीं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा और संबोधन आरएसएस की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर संगठन की उपलब्धियों और समाज में इसके योगदान को रेखांकित करता है।
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