🧭 मध्यस्थता क्यों है जनता के लिए लाभकारी? : नालसा का “विशेष मध्यस्थता अभियान” — न्यायिक पहुंच को सरल बनाने की दिशा में प्रभावशाली पहल
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jul 1, 2025
विशेष समाचार | 1 जुलाई 2025: नालसा का “विशेष मध्यस्थता अभियान” — न्यायिक पहुंच को सरल बनाने की दिशा में प्रभावशाली पहल
नई दिल्ली/भोपाल | 1 जुलाई 2025
आज देशभर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा विशेष मध्यस्थता अभियान (Special Mediation Campaign) का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य है — लंबित मामलों का त्वरित, सौहार्दपूर्ण और न्यायपूर्ण समाधान। यह अभियान पूरे देश में जिला एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों के माध्यम से संचालित हो रहा है।
📘 NALSA विशेष मध्यस्थता अभियान क्या है?
यह एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जो 1 जुलाई 2025 से 31 जुलाई 2025 तक चलाई जा रही है। इसका उद्देश्य अदालतों में लंबित दीवानी, पारिवारिक, उपभोक्ता, संपत्ति, वाहन दुर्घटना, बैंक ऋण एवं अन्य विवादों को बिना मुकदमेबाजी के, मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्वक हल करना है।
📌 इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य:
लंबित मामलों की संख्या में कमी लाना।
पारस्परिक सहमति से त्वरित न्याय उपलब्ध कराना।
मुकदमेबाजी के खर्च, समय और तनाव को कम करना।
मध्यस्थता संस्कृति को बढ़ावा देना, विशेषकर आमजन में।
👥 किन मामलों को लिया जा रहा है:
परिवार विवाद (विवाह, भरण-पोषण आदि)
बैंक ऋण वसूली के मामले
मोटर वाहन दुर्घटना दावे
श्रम एवं सेवा विवाद
उपभोक्ता संरक्षण के अंतर्गत शिकायतें
संपत्ति बंटवारे या किरायेदारी विवाद
अन्य दीवानी व Compoundable आपराधिक मामले
⚖️ NALSA के अंतर्गत कौन-कौन भागीदार हैं:
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA)
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA)
उच्च न्यायालय और जिला न्यायालय
पैनल अधिवक्ता, मध्यस्थ (Mediators), और परामर्शदाता
सिविल सोसायटी संगठनों और बार एसोसिएशन का भी सहयोग
🏛️ क्यों जरूरी है यह अभियान?
भारत में 4.5 करोड़ से अधिक मामले न्यायालयों में लंबित हैं।
परंपरागत अदालती प्रक्रिया लंबी, खर्चीली और तनावपूर्ण हो सकती है।
मध्यस्थता (Mediation) आपसी समझ-बूझ और गोपनीयता के आधार पर विवादों का हल निकालती है।
इससे न्यायालयों पर बोझ कम होता है और जनता को त्वरित न्याय मिलता है।
📢 अभियान का संचालन कैसे होता है?
न्यायालय द्वारा उपयुक्त मामलों की Screening की जाती है।
दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए स्वैच्छिक रूप से आमंत्रित किया जाता है।
प्रशिक्षित मध्यस्थ (Trained Mediators) के समक्ष सुनवाई व समाधान वार्ता होती है।
समझौता होने पर समझौता पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर उसे अंतिम आदेश बना दिया जाता है।
🧭 मध्यस्थता क्यों है जनता के लिए लाभकारी?
लाभ | विवरण |
|---|---|
समय की बचत | वर्षों के मुकदमे महीनों में निपट सकते हैं |
गोपनीयता | विवादों की जानकारी सार्वजनिक नहीं होती |
खर्च कम | मुकदमेबाजी की तुलना में कम खर्च |
संबंधों में सुधार | आपसी सहमति से समाधान से मनमुटाव कम होता है |
🌟 नालसा: न्याय तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करने का दायित्व
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) का गठन विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत किया गया था, ताकि समाज के कमजोर वर्गों को नि:शुल्क कानूनी सहायता मिल सके और "न्याय सबके लिए सुलभ हो" — यह लक्ष्य पूर्ण हो सके।
📍 निष्कर्ष:
1 जुलाई से प्रारंभ यह विशेष मध्यस्थता अभियान न केवल एक विधिक पहल है, बल्कि न्याय प्रणाली को सरल, मानवीय और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम भी है।
हर नागरिक को चाहिए कि वह विवादों के समाधान हेतु अदालत के बजाय मध्यस्थता जैसे वैकल्पिक मार्ग अपनाए।
📍 “जन-जागरण से न्याय जागरूकता की ओर”
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