हिन्दू राष्ट्र और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण करें : संघ की शताब्दी पर समाज को संदेश : संगठित होकर आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत का निर्माण करें
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Sep 25, 2025
संघ की शताब्दी पर समाज को संदेश : संगठित होकर आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत का निर्माण करें
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर यह केवल संगठन की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे हिन्दू समाज और राष्ट्रजीवन की ऐतिहासिक उपलब्धि है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार ने इस उद्देश्य से की थी कि संगठित समाज ही राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बना सकता है। सौ वर्षों की इस यात्रा में संघ ने शाखा, शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के माध्यम से राष्ट्र की आत्मा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया।
संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का कहना है कि यह अवसर केवल उत्सव का नहीं बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का है। समाज के लिए संघ का संदेश स्पष्ट है –
एकता का संदेश – जाति, भाषा, क्षेत्र या सम्प्रदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं। हम सब भारत माता की संतान हैं।
आत्मगौरव का संदेश – अपनी संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान पर गर्व करें, आधुनिकता को अपनी जड़ों से जोड़कर आत्मसात करें।
स्वावलंबन का संदेश – आत्मनिर्भर भारत का निर्माण प्रत्येक नागरिक के परिश्रम और कौशल से होगा।
सेवा और चरित्र निर्माण का संदेश – राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का कार्य नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। सेवा, अनुशासन और नैतिकता ही समाज को सशक्त बनाते हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा – शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, खेल और उद्योग – हर क्षेत्र में युवाओं को राष्ट्रसेवा की भावना से कार्य करना होगा।
विश्व बंधुत्व का संदेश – “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से समस्त मानवता के कल्याण का लक्ष्य रखना होगा।
संघ ने बीते 100 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सेवा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम उत्थान और स्वावलंबन जैसे क्षेत्रों में अनगिनत कार्य किए हैं। यह सिद्ध हो चुका है कि अनुशासन, निरंतरता और राष्ट्रभावना से असंभव भी संभव हो सकता है।
राष्ट्रीय पदाधिकारियों का आह्वान है कि शताब्दी वर्ष में हम सब मिलकर एक ऐसे हिन्दू राष्ट्र और संगठित हिन्दू समाज का निर्माण करें, जो समृद्ध, आत्मनिर्भर, शक्तिशाली और विश्व को मार्गदर्शन देने वाला हो।
“आओ, शताब्दी वर्ष में हम सब मिलकर भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प लें।”
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