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गौरैया की घटती संख्या और कबूतरों का बढ़ता दबदबा : 20 मार्च: विश्व गौरैया दिवस – अब गौरैया के घरों पर कबूतरों का कब्जा!

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Mar 20, 2025

20 मार्च: विश्व गौरैया दिवस – अब गौरैया के घरों पर कबूतरों का कब्जा!

नई दिल्ली, 20 मार्च – कभी घर-आंगन में चहकने वाली गौरैया अब धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। शहरीकरण, बढ़ते प्रदूषण और आधुनिक निर्माण शैली के कारण जहां गौरैया को अपने घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल रही, वहीं कबूतरों ने इन खाली पड़े स्थानों पर कब्जा जमा लिया है।

गौरैया की घटती संख्या और कबूतरों का बढ़ता दबदबा

विशेषज्ञों का मानना है कि बीते कुछ दशकों में गौरैया की संख्या में भारी गिरावट आई है। वहीं, कबूतरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • घरों और इमारतों की संरचना में बदलाव – पहले के मकानों में छोटे-छोटे छेद और कोने होते थे, जहां गौरैया घोंसला बना लेती थी। अब आधुनिक इमारतों में ऐसी जगह नहीं बची।

  • भोजन की उपलब्धता – शहरों में लोग खुले स्थानों पर कबूतरों को दाना डालते हैं, जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। वहीं, गौरैया के लिए प्राकृतिक भोजन के स्रोत कम हो रहे हैं।

  • मोबाइल टावर और प्रदूषण – रेडिएशन और कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग ने गौरैया के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।

कबूतरों से बढ़ रही समस्याएं

पर्यावरणविदों के अनुसार कबूतरों की बढ़ती संख्या कई तरह की समस्याएं पैदा कर रही है। इनसे एलर्जी, सांस की बीमारियाँ और इमारतों को नुकसान होने की शिकायतें बढ़ रही हैं। वहीं, गौरैया जैसे छोटे पक्षियों के लिए जगह बचती ही नहीं है।

गौरैया को बचाने के लिए क्या करें?

  • घर में छोटे घोंसले या लकड़ी के बॉक्स लगाएं, ताकि गौरैया को रहने की जगह मिले।

  • छत और बालकनी में पानी और अनाज रखें, खासकर बाजरा, जो गौरैया पसंद करती है।

  • कबूतरों को खुली जगहों पर दाना देने से बचें, ताकि वे गौरैया के घोंसले वाले स्थानों पर कब्जा न करें।

  • पेड़-पौधे लगाएं, ताकि प्राकृतिक आवास बने रहें।

संरक्षण के प्रयास जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वह दिन दूर नहीं जब गौरैया सिर्फ किताबों और तस्वीरों में ही नजर आएगी। इस विश्व गौरैया दिवस पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि गौरैया के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करें, ताकि यह नन्ही चिड़िया फिर से हमारे घर-आंगन में चहक सके।

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