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मध्यप्रदेश अकेला नहीं है — कई राज्यों ने इसी तरह की नीतिगत शिथिलता : मध्यप्रदेश ने 24 साल बाद “दो-बच्चे” रोक पर पुनर्विचार किया; प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा गया

Ashwani Kumar Sinha

Fri, Nov 28, 2025

मध्यप्रदेश ने 24 साल बाद “दो-बच्चे” रोक पर पुनर्विचार किया; प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा गया

भोपाल — मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के कर्मचारियों पर लागू 24 साल पुराने “दो-बच्चे” नियम (Two-child norm) को हटाने की तैयारी कर ली है। यह प्रस्ताव जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) ने मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा है और कैबिनेट मंजूरी के लिए रखा जाना है। अगर मंजूर हुआ तो सरकारी सेवा नियमों में संशोधन के बाद सरकारी कर्मचारियों के ऊपर यह प्रतिबंध खत्म हो जाएगा।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह प्रस्ताव तीन माह की विस्तृत विचार-मंथन और वरिष्ठ अधिकारियों की राय लेने के बाद अंतिम रूप में लाया गया है। सूत्रों का कहना है कि प्रस्ताव पर समीक्षा अक्टूबर-नवंबर 2025 में तेज़ हुई और अब इसे निर्णय के लिए पेश किया गया है।

यह बदलाव उस समय विवादास्पद ध्यानाकर्षण में आया जब आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पिछले वर्ष (उनके बयानों के रेकॉर्ड के मुताबिक दिसंबर-2024 से 2025 के बीच) कहा था कि “प्रत्येक परिवार में कम से-कम तीन बच्चे होने चाहिए” ताकि जनसंख्या संतुलन बना रहे — इस बयान ने सार्वजनिक और राजनीतिक बहस तेज की थी। कुछ समाचारों में उनके रुख का सरकारों के निर्णयों पर प्रभाव की चर्चाएँ भी देखी गईं।

मध्यप्रदेश अकेला नहीं है — कई राज्यों ने इसी तरह की नीतिगत शिथिलता पहले ही कर दी थी। राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले भी इसी प्रकार के प्रतिबंधों में नरमी ला चुके हैं: राजस्थान ने कर्मचारियों के सिलसिले में और स्थानीय निकायों के लिए नियमों के संदर्भ में पिछले वर्षों में इन प्रावधानों पर संशोधन या शिथिलता दिखाई है, जबकि छत्तीसगढ़ ने 2017 में सरकारी कर्मचारियों के संबंध में दो-बच्चे पर लागू नियमों को हटाने का निर्णय लिया था।

विश्लेषक मानते हैं कि जनसांख्यिकीय चुनौतियाँ, राजनीतिक-प्रभाव और सामाजिक बहस—तीनों ने मिलकर राज्य सरकारों को इन नीतियों की समीक्षा के लिए प्रेरित किया है। आलोचक कहते हैं कि यह कदम सामाजिक और लैंगिक प्रभावों, और महिला-स्वास्थ्य व अधिकारों पर लंबी चर्चा के विषय हैं; समर्थक इसे कर्मचारियों की सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन की आवश्यकता से जोड़ते हैं।

ताज़ा स्थिति: मध्यप्रदेश का प्रस्ताव कैबिनेट में है; अंतिम निर्णय और अधिसूचना सामने आने पर नियम औपचारिक रूप से हटाया जाएगा (या संशोधित)।

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