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बच्चों के हित में : स्कूलों में छड़ी रखना, भले ही उसका उपयोग न किया जाए, अनुशासन बनाए रखने के लिए एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकता। हाइकोर्ट

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Mar 18, 2025

केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हिकृष्णन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षक समाज के अनदेखे नायक हैं और बिना उचित जांच के उनके खिलाफ मामले दर्ज करना शिक्षा प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने यह भी टिप्पणी की कि पुराने समय में केवल शिक्षक की उपस्थिति से ही अनुशासन स्थापित हो जाता था, लेकिन आज शिक्षक लगातार आपराधिक मामलों के खतरे में काम कर रहे हैं, जो शिक्षा के भविष्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में बेंत रखना, भले ही उसका उपयोग न किया जाए, अनुशासन बनाए रखने के लिए एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकता है।

इस फैसले के आलोक में, राज्य पुलिस प्रमुख को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने से पहले प्राथमिक जांच को अनिवार्य बनाने के लिए एक परिपत्र जारी करें। यह कदम शिक्षकों को झूठे आरोपों से बचाने और शिक्षा प्रणाली में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

यह निर्णय शिक्षकों को मनमाने ढंग से दर्ज किए गए आपराधिक मामलों से बचाने की एक मिसाल कायम करता है, जबकि यह भी सुनिश्चित करता है कि अनुचित आचरण की वास्तविक शिकायतों की पूरी जांच हो। केरल हाईकोर्ट के इस निर्देश से शिक्षकों और छात्रों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि शिक्षकों द्वारा स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के लिए सरल सुधारात्मक उपायों का उपयोग करना अपराध नहीं माना जाएगा। यह फैसला एक शिक्षक के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 (शारीरिक दंड) और आईपीसी की धारा 324 के तहत शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करते हुए दिया गया।

न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि शिक्षक अपनी सीमा के भीतर रहते हुए अनुशासन बनाए रखने के लिए सुधारात्मक उपाय अपनाते हैं, तो उन्हें अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, यदि शिक्षक अपनी सीमा से परे जाकर गंभीर चोट या शारीरिक हमला करते हैं, तो निश्चित रूप से कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

इससे पहले, केरल हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में कहा था कि स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के लिए बच्चों को थप्पड़ मारना गंभीर अपराध नहीं माना जा सकता, बशर्ते कि इससे बच्चों को कोई बाहरी चोट न पहुंचे।

इन फैसलों से स्पष्ट होता है कि केरल हाईकोर्ट शिक्षकों को स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने के लिए उचित सुधारात्मक उपाय अपनाने की अनुमति देता है, जब तक कि वे अपनी सीमाओं के भीतर रहते हैं और छात्रों को गंभीर शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाते।

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