भारकेश्वर धाम पर मौजूद आदिमानव शैल चित्र और प्राकृतिक धरोहर : भारकेश्वर धाम से कांवड़ यात्रा, प्राचीन धरोहर पर खतरा – स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Jul 28, 2025
भारकेश्वर धाम से कांवड़ यात्रा, प्राचीन धरोहर पर खतरा – स्थानीय लोगों ने जताई चिंता
पिपरई (मध्यप्रदेश), सोमवार (तृतीया सोमवार) –
पिपरई के पास स्थित भारकेश्वर धाम, जिसे भरका नाम से भी जाना जाता है, भोलेनाथ का प्राचीन स्थल और महाभारतकालीन धरोहर माना जाता है। चारों ओर पहाड़ों से घिरा यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, विशाल जलप्रपात (वॉटरफॉल कुंड), शैल चित्रों, गुफाओं और भीम पदचिन्हों के लिए प्रसिद्ध है।
आज तृतीया सोमवार पर ग्रामीण भक्तों ने यहां से कांवड़ यात्रा निकाली।
प्यासी गांव और ग्राम गरेठी के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।
बाबा भोलेनाथ के जयकारों, गीतों और नृत्य के साथ भक्तों ने कांवड़ यात्रा निकाली और धाम से जल लेकर प्यासी की ओर प्रस्थान किया।
यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ और पुलिस प्रशासन सुरक्षा में मौजूद रहा।
प्राचीन धरोहर पर संकट – संरक्षण की मांग
स्थानीय जागरूक नागरिक राजेंद्र सिंह (गरेठी) ने इस अवसर पर कहा:
भारकेश्वर धाम पर मौजूद आदिमानव शैल चित्र और प्राकृतिक धरोहर

खनिज दोहन और लापरवाही के कारण नष्ट होने की कगार पर हैं।2015 से अब तक भारी पैमाने पर मुरम और खनिज संपदा की अवैध निकासी (भ्रष्टाचार) हुई है, क्योंकि यहां सुरक्षा या निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
छोटे-बड़े नेताओं की उदासीनता के कारण यह धरोहर लुप्त होने की स्थिति में है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखकर यहां गो-अभयारण्य और सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने तथा इस धरोहर की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
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