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सार्वजनिक स्थानों पर सामाजिक आयोजनों को लेकर मनमानी प्रशासनिक शर्तें न : कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर लगाई रोक, स्वयंसेवकों को मिली राहत

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Oct 28, 2025

कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर लगाई रोक, स्वयंसेवकों को मिली राहत

सार्वजनिक स्थलों पर कार्यक्रमों के लिए अनुमति अनिवार्य करने के आदेश पर अदालत ने जताई आपत्ति

बेंगलुरु, 28 अक्टूबर 2025।
कर्नाटक सरकार द्वारा हाल ही में जारी उस आदेश पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अंतरिम स्थगन (Interim Stay) जारी कर दिया है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) सहित सामाजिक संगठनों को किसी भी सार्वजनिक स्थान, पार्क, विद्यालय या सरकारी संस्थान परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने से पहले अनिवार्य रूप से सरकारी अनुमति लेना जरूरी बताया गया था।

आदेश पर सवाल

राज्य सरकार का 18 अक्टूबर को जारी आदेश कहता था कि सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल-कॉलेज, पार्क-मैदान, सड़क, सार्वजनिक भवन आदि में किसी भी निजी या सामाजिक संगठन को कार्यक्रम करने से पहले स्थानीय प्रशासन से लिखित अनुमति लेनी होगी।
सरकार का तर्क था कि यह निर्णय कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लिया गया।

परंतु इस आदेश के बाद राज्यभर में असंतोष की लहर उठी। अनेक सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवक समूहों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

याचिका और सुनवाई

Punashchaitanya Seva Samsthe नामक संस्था ने इस आदेश को न्यायालय में चुनौती दी।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई में कहा कि आदेश में सरकार का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है और इसका प्रभाव नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा पड़ सकता है।
इस पर अदालत ने आदेश के कार्यान्वयन पर तात्कालिक रोक लगाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
अगली सुनवाई 17 नवंबर 2025 को होगी।

स्वयंसेवकों को मिली राहत

इस अंतरिम निर्णय से राज्य के स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
अब वे पूर्व की तरह अपने नियमित शाखा, सामाजिक सेवा, तथा जागरूकता कार्यक्रम बिना नई प्रशासनिक बाधा के आयोजित कर सकेंगे — हालांकि, अंतिम निर्णय आने तक सजगता बरतना आवश्यक रहेगा।

विशेषज्ञों की राय

संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का उद्देश्य यदि सार्वजनिक संपत्तियों का संरक्षण था, तो इसके लिए पहले से ही स्थानीय प्रशासनिक प्रावधान मौजूद हैं।
नया आदेश सामाजिक संगठनों की गतिविधियों को अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित कर सकता था।
अदालत का यह निर्णय नागरिक स्वतंत्रताओं के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

यह मामला केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है — बल्कि यह इस बात का संकेत है कि समाज में सक्रिय संगठन, चाहे वे सेवा, शिक्षा या सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े हों, उन्हें कानूनी-प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी रखनी चाहिए और अपने कार्यक्रम पारदर्शी व अनुशासित ढंग से आयोजित करने चाहिए।


कर्नाटक हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगाकर स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर सामाजिक आयोजनों को लेकर मनमानी प्रशासनिक शर्तें नहीं थोपी जा सकतीं। यह फैसला स्वयंसेवकों और नागरिक संगठनों की स्वतंत्र गतिविधियों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण राहत है।

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