कंप्यूटर विज्ञान में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर संगोष्ठी : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में बताया“ भारतीय ज्ञान परंपरा स्वर्ण भण्डार “
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Sep 12, 2025
कंप्यूटर विज्ञान में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर विशेष संगोष्ठी
भोपाल, 11 सितम्बर 2025।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में आज “कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता” विषय पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन “शोध आयाम” (मध्य भारत प्रांत, प्रज्ञा प्रवाह) के तत्वावधान में किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कंप्यूटर विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र की पूर्व निदेशक डॉ. माया इंगले ने अपने विचार रखे।
भारतीय ज्ञान परंपरा का आधुनिक महत्व
डॉ. इंगले ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अध्यात्म और दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि गणित, भाषाविज्ञान, तर्कशास्त्र, चिकित्सा और खगोल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी इसका अमूल्य योगदान रहा है। उन्होंने कई उदाहरण प्रस्तुत किए—
पाणिनी की अष्टाध्यायी आधुनिक कम्पाइलर डिज़ाइन और NLP की नींव है।
पिंगलाचार्य का छंदसूत्र बाइनरी संख्याओं और एल्गोरिद्म की प्रारंभिक अवधारणा देता है।
महावीर और भास्कराचार्य के सूत्र आज भी क्रमचय-संचय और प्रायिकता सिद्धांत में उपयोगी हैं।
वैदिक गणित तेज गणना, क्रिप्टोग्राफी और एल्गोरिद्म डिज़ाइन में प्रासंगिक है।
उन्होंने यह भी बताया कि स्वामी भारती कृष्ण तीर्थ द्वारा प्रतिपादित 16 सूत्र और उपसूत्र डिजिटल युग में नए शोध आयाम खोलते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और नई दृष्टि
संगोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा और अनुसंधान के हर स्तर पर समाहित करने पर बल देती है। भारतीय परंपरा, जो ज्ञान, प्रज्ञा और सत्य की खोज को सर्वोपरि मानती है, आज भी शोध और नवाचार की प्रेरणा बनी हुई है।
विद्यार्थियों का संकल्प
संगोष्ठी में उपस्थित विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को “स्वर्ण भंडार” बताते हुए इसे आधुनिक शिक्षा और अनुसंधान में पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया।
विज्ञापन