अखिल भारतीय पूर्णकालिक एवं प्रशिक्षक वर्ग – स्वावलंबी भारत अभियान" : हरिद्वार में पूर्णकालिकों का उत्सवपूर्ण समापन: आत्मनिर्भर भारत के लिए नए संकल्प
Ashwani Kumar Sinha
Mon, Jun 2, 2025
हरिद्वार में पूर्णकालिकों का उत्सवपूर्ण समापन: आत्मनिर्भर भारत के लिए नए संकल्प


हरिद्वार, शांतिकुंज | विशेष संवाददाता
शांतिकुंज हरिद्वार में आयोजित "अखिल भारतीय पूर्णकालिक एवं प्रशिक्षक वर्ग – स्वावलंबी भारत अभियान" का भव्य समापन समारोह युवाओं में नई चेतना, नवसंकल्प और संगठनात्मक ऊर्जा का संचार कर गया। इस आयोजन में मध्य क्षेत्र के समर्पित कार्यकर्ताओं की घोषणा हुई, जिन्होंने स्वदेशी, स्वावलंबन और संस्कार आधारित भारत के निर्माण में नई भूमिका निभाने की प्रतिज्ञा ली।
🌟 मध्य क्षेत्र के नवगठित दायित्व:
श्री हेमन्त जी रावत – अब मध्यभारत प्रांत के संगठक के रूप में कार्य करेंगे। पहले वे चार विभागों के संगठक थे।
श्री शंकर जी त्रिपाठी – छत्तीसगढ़ प्रांत के पूर्णकालिक नियुक्त किए गए हैं। पूर्व में रायपुर व बिलासपुर विभागों में सक्रिय थे।
श्री मनोहर लाल जी पथरोल – महाकौशल प्रांत के पूर्णकालिक बनाए गए हैं, साथ ही स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान का दायित्व भी संभालेंगे।
श्री आकाश जी – अब जबलपुर और छिंदवाड़ा दो विभागों के संगठक होंगे। पूर्व में जबलपुर विभाग के संगठक थे।
श्री कपिल जी मलैया – मध्य प्रदेश के समस्त स्वावलंबन केन्द्रों के कार्य प्रमुख बनाए गए हैं। पूर्व में वे महाकौशल प्रांत के समन्वयक थे।
🗣️ प्रेरणास्पद उपस्थिति और उद्बोधन:
समापन सत्र को गरिमामय बनाने हेतु कई प्रमुख विद्वतजनों ने उपस्थिति दर्ज कराई और अपने विचारों से उपस्थित पूर्णकालिकों को सशक्त किया:
डॉ. चिन्मय पंड्या जी, प्रति कुलपति, देव संस्कृति विश्वविद्यालय
👉 “व्यक्ति जो चाहता है, वह बन जाता है।” – यह प्रेरक संदेश उन्होंने दिया।महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी जी महाराज, महंत, भारत माता मंदिर
श्री सतीश कुमार जी, सह-संगठक, स्व. जा. मंच
श्री योगेन्द्र गिरी जी, व्यवस्थापक, शांतिकुंज
डॉ. राजीव कुमार जी, अखिल भारतीय विचार विभाग प्रमुख
श्री सतीश चावला जी, अखिल भारतीय पूर्णकालिक प्रमुख
🕊️ स्वावलंबन का संकल्प, स्वदेशी का संचार
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने हेतु स्वावलंबन, संस्कार, समाजसेवा और स्वदेशी के मूल्यों को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। समापन सत्र में विभिन्न प्रेरक अनुभव, संवाद और राष्ट्रहित के कार्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिसने सभी प्रतिभागियों को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया।
📸 क्षणिका झलकियाँ:
वैचारिक सत्रों में आत्ममंथन और दिशा दर्शन
पूर्णकालिकों को सम्मानपूर्वक नई जिम्मेदारियाँ सौंपना
स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी एवं अनुभव-विनिमय
🔖 संदेश जो छू गया दिल को:
"संघर्ष में तपकर जो निकलता है, वही समाज का दीप बनता है।"
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