निर्देश का मुख्य सार : न्यायालय कक्षों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का सख्त निर्देश
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Jun 20, 2025
📰 न्यायालय कक्षों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का सख्त निर्देश
रायपुर, 19 जून 2025 — छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने न्यायालय परिसर की मर्यादा और कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वादियों, पक्षकारों और आम नागरिकों को न्यायालय कक्षों में मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की है।
यह निर्देश अधिसूचना क्रमांक – 207(विविध)/11-14-1(2025) दिनांक 18 जून 2025 के तहत प्रभाव में आया है।
🔒 क्या है निर्देश का मुख्य सार?
🔇 कोई भी मोबाइल फोन या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण न्यायालय कक्ष में लेकर जाना प्रतिबंधित है, भले ही वह बंद अवस्था में ही क्यों न हो।
🎥 न्यायालय की कार्यवाही का कोई भी भाग रिकॉर्ड करने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है।
ऐसा करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।⚖️ यह निर्देश न्यायालय की कार्यप्रणाली की पवित्रता, गोपनीयता एवं गरिमा बनाए रखने के लिए लागू किया गया है।
👨⚖️ आदेश सभी वादियों, पक्षकारों, आगंतुकों और अन्य न्यायालय में उपस्थित नागरिकों पर समान रूप से लागू होगा।
🧭 इस आदेश का उद्देश्य क्या है?
न्यायालय की कार्यवाही को अनधिकृत रूप से रिकॉर्ड करना, प्रसारित करना या उसका दुरुपयोग करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
बढ़ते डिजिटल दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप्स वायरल होने की घटनाओं ने अदालतों की कार्यवाही की निजता और निष्पक्षता को खतरे में डाला है।
यह निर्देश न्यायिक संस्थाओं की गरिमा को बनाये रखने और न्यायिक गोपनीयता को संरक्षित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।
⚠️ यदि निर्देश का उल्लंघन हुआ तो क्या होगा?
आदेश का उल्लंघन अवमानना (contempt of court) की श्रेणी में आ सकता है।
संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध न्यायालय द्वारा कानूनी कार्यवाही एवं दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायालय परिसर में तैनात सुरक्षा कर्मियों को निर्देश का सख्ती से पालन कराने हेतु अधिकृत किया गया है।
📣 नागरिकों से अपील
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सभी वादियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों से इस आदेश का पालन करने की अपील की है, जिससे न्यायिक कार्यवाही निर्बाध, सुरक्षित और मर्यादित ढंग से संपन्न हो सके।
🔚 निष्कर्ष
यह निर्देश केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा और निष्पक्षता की रक्षा का माध्यम है। यह सुनिश्चित करेगा कि अदालतें न्याय देने का कार्य निर्भीक, निष्पक्ष और गोपनीय वातावरण में कर सकें।
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