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सच्चा शिक्षक केवल ज्ञान नहीं बाँटता, बल्कि समाज को दिशा देता है। : डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्ण : शिक्षा, दर्शन और राष्ट्रसेवा के अद्वितीय प्रतीक

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Sep 4, 2025

डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्ण : शिक्षा, दर्शन और राष्ट्रसेवा के अद्वितीय प्रतीक

नई दिल्ली। डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्ण (1888–1975) केवल भारत के दूसरे राष्ट्रपति और पहले उपराष्ट्रपति ही नहीं थे, बल्कि विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक, अध्यापक और शिक्षाविद भी थे। उनका जीवन और योगदान अनेक दृष्टियों से अद्वितीय रहा

नोबेल पुरस्कार नामांकन – 27 बार

राधाकृष्ण को 16 बार साहित्य और 11 बार शांति के लिए, कुल 27 बार नोबेल पुरस्कार हेतु नामांकित किया गया। यह उन्हें बीसवीं शताब्दी के सर्वाधिक चर्चित दार्शनिकों में स्थापित करता है।

ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय का गौरव

1936 से 1952 तक वे ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय में “Spalding Professor of Eastern Religion and Ethics” के रूप में कार्यरत रहे। वे इस पद पर आसीन होने वाले पहले एशियाई विद्वान थे और All Souls College के फेलो भी चुने गए

निर्विरोध उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति

1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए। 1957 में दोबारा निर्विरोध उपराष्ट्रपति बने। तत्पश्चात 1962 में वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने और 1967 तक इस पद पर कार्य किया।

Templeton पुरस्कार और उदार दान

1975 में उन्हें विश्व-प्रसिद्ध Templeton Prize प्रदान किया गया। उन्होंने यह पूरी राशि ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय को छात्रवृत्ति हेतु दान कर दी। यह उनके त्याग और शिक्षा के प्रति समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण है।

शिक्षक दिवस की परंपरा

जब उनके छात्रों ने उनके जन्मदिन (5 सितंबर) को मनाने की इच्छा जताई, तब राधाकृष्ण ने विनम्रता से कहा—“यदि आप वास्तव में मेरा सम्मान करना चाहते हैं तो इस दिन को ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाइए।” तभी से पूरे भारत में 5 सितंबर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सामाजिक दृष्टि

उनका नाम कुछ सामाजिक पहलों से भी जोड़ा गया है, जैसे वरिष्ठ नागरिक कल्याण संबंधी कार्यों में मार्गदर्शन। हालांकि संस्थापक के रूप में उनका प्रत्यक्ष नाम विवादास्पद है, परंतु समाजसेवा में उनकी दृष्टि हमेशा प्रेरणादायी रही।

डॉ. सर्वेपल्ली राधाकृष्ण का जीवन शिक्षा, दर्शन और राष्ट्र सेवा का अद्भुत संगम है।

  • 27 बार नोबेल नामांकन

  • ऑक्सफ़ोर्ड में प्रतिष्ठित अध्यापन

  • भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति

  • Templeton पुरस्कार राशि का दान

  • शिक्षक दिवस की परंपरा

उनका व्यक्तित्व आज भी हमें यह संदेश देता है कि सच्चा शिक्षक केवल ज्ञान नहीं बाँटता, बल्कि समाज को दिशा देता है।


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