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अतिरिक्त संचालक का निर्देश भी अनदेखा : ग्वालियर-चंबल संभाग में प्राचार्य पदभार को लेकर विवाद, वरिष्ठता नियमों की अनदेखी का आरोप

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Mar 31, 2026

ग्वालियर-चंबल संभाग में प्राचार्य पदभार को लेकर विवाद, वरिष्ठता नियमों की अनदेखी का आरोप

ग्वालियर। डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय में प्राचार्य पदभार को लेकर विवाद गहरा गया है। महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. आरती गुप्ता के 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त होने के दिन ही उन्होंने प्राचार्य का प्रभार एक कनिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकेश गर्ग को सौंप दिया, जबकि संस्थान में कई वरिष्ठ प्राध्यापक मौजूद हैं।

इस निर्णय से महाविद्यालय के प्राध्यापकों में रोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि वरिष्ठता को दरकिनार कर लिया गया यह फैसला न केवल प्रशासनिक परंपराओं के विपरीत है, बल्कि वरिष्ठ शिक्षकों के सम्मान के साथ भी अन्याय है।

क्या है नियम और प्रक्रिया?

उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश के प्रचलित नियमों के अनुसार—

प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने या पद रिक्त होने की स्थिति में वरिष्ठतम प्राध्यापक को प्रभारी प्राचार्य बनाया जाता है।

यदि कोई वरिष्ठ प्राध्यापक असहमति जताता है, तभी क्रमवार अगले वरिष्ठ को अवसर दिया जाता है।

इस प्रक्रिया में संबंधित प्राध्यापकों की लिखित सहमति/असहमति लेना अनिवार्य होता है।

अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी या क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा लिया जाता है।

अतिरिक्त संचालक का निर्देश भी अनदेखा

जानकारी के अनुसार, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा ग्वालियर-चंबल संभाग ने 30 मार्च 2026 को पत्र जारी कर वरिष्ठ प्राध्यापकों की सूची एवं उनकी सहमति/असहमति मांगी थी।

प्राध्यापकों का आरोप है कि इस निर्देश का पालन किए बिना ही कनिष्ठ प्राध्यापक को प्रभार सौंप दिया गया।

8 प्राध्यापकों ने दर्ज कराई आपत्ति

महाविद्यालय के 8 प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों ने सामूहिक रूप से अतिरिक्त संचालक को पत्र भेजकर—

प्राचार्य पदभार ग्रहण करने हेतु अपनी सहमति दी है

वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति की मांग की है

निर्णय को “अन्याय एवं अनादर” बताते हुए पुनर्विचार की अपील की है

परीक्षा के बीच बढ़ा प्रशासनिक संकट

वर्तमान में जीवाजी विश्वविद्यालय की परीक्षाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में महाविद्यालय में प्रशासनिक असमंजस की स्थिति बनने की आशंका है।

अब पूरा मामला अतिरिक्त संचालक के निर्णय पर निर्भर है कि—

क्या वरिष्ठता नियमों के आधार पर नया आदेश जारी किया जाएगा

या वर्तमान व्यवस्था को ही जारी रखा जाएगा

फिलहाल, महाविद्यालय का माहौल संवेदनशील बना हुआ है और सभी की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।

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