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असंगत पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों का शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित : भोपाल में ग्राहक पंचायत ने उठाई मांग — निजी स्कूलों में शासकीय पाठ्यक्रम लागू करने हेतु सौंपा ज्ञापन

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Apr 28, 2025


भोपाल में ग्राहक पंचायत ने उठाई मांग — निजी स्कूलों में शासकीय पाठ्यक्रम लागू करने हेतु सौंपा ज्ञापन

भोपाल, 28 अप्रैल 2025।
प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा अपने-अपने अनुसार महंगे और भारी भरकम पाठ्यक्रम लागू किए जाने के विरोध में आज अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, भोपाल महानगर के प्रतिनिधिमंडल ने मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के माननीय मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी निजी विद्यालयों में शासन द्वारा अधिकृत पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए।

ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश के प्रत्येक शहर और कस्बों में संचालित निजी विद्यालयों में भिन्न-भिन्न प्रकाशनों की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। निजी स्कूल संचालक अपने विवेकानुसार पाठ्यक्रम का चयन करते हैं और केवल कुछ विशेष दुकानों पर उपलब्ध महंगी किताबें विद्यार्थियों को खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। इससे पालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव एवं तनाव की स्थिति निर्मित हो रही है।

ग्राहक पंचायत ने अपने ज्ञापन में उदाहरण देते हुए उल्लेख किया कि जहाँ एनसीईआरटी की लगभग 250 पृष्ठों की पुस्तक ₹60 से ₹75 के बीच मिलती है, वहीं निजी प्रकाशनों की मात्र 120 से 130 पृष्ठों वाली पुस्तक ₹500 से ₹600 तक की कीमत पर उपलब्ध है। ऐसे महंगे और असंगत पाठ्यक्रम से ना केवल विद्यार्थियों का शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके बीच असमानता व हीन भावना भी पनप रही है।

राजपत्र का भी किया हवाला
प्रतिनिधिमंडल ने म.प्र. शासन द्वारा 4 दिसंबर 2020 को जारी राजपत्र का हवाला देते हुए कहा कि उसमें स्पष्ट उल्लेख है कि निजी विद्यालयों को संबद्ध बोर्ड अथवा परीक्षा निकाय के विनियमों के अनुसार ही पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण करना चाहिए। इसके बावजूद अनेक निजी विद्यालय स्वेच्छा से महंगे निजी प्रकाशनों की पुस्तकें थोप रहे हैं। (प्रतिनिधिमंडल ने राजपत्र की प्रति भी संलग्न की।)

बच्चों के सर्वांगीण विकास में बाधा
ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया गया कि अत्यधिक और कठिन पाठ्यक्रम के कारण बच्चे शैक्षणिक तनाव में रहते हैं। मानसिक दवाब के कारण वे खेलकूद, साहित्यिक, सांस्कृतिक और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में खुलकर भाग नहीं ले पाते, जिससे उनका सर्वांगीण विकास बाधित होता है।

पालकों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
ग्राहक पंचायत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महंगी पुस्तकों की अनिवार्यता से मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय पालकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है, जो शिक्षा के अधिकार की भावना के विपरीत है। शिक्षा को सुगम और सुलभ बनाए रखने हेतु शासकीय पाठ्यक्रम की अनिवार्यता अत्यंत आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल में ये सदस्य रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, भोपाल महानगर के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र सिंह, सचिव श्री दीपक चौरसिया, सदस्य श्री शैलेन्द्र सिंह एवं प्रचार आयाम से श्री अश्वनी कुमार सिन्हा व अन्य स्वयं सेवक शामिल रहे। भोपाल महानगर की मांग की कि प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों में विशेषज्ञों द्वारा तैयार शासकीय पाठ्यक्रम को लागू किया जाए और महंगी पुस्तकों की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

शासन से शीघ्र निर्णय की अपेक्षा
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री महोदय से आग्रह किया कि वे शीघ्र निर्णय लेकर पालकों एवं विद्यार्थियों को इस अन्याय से राहत दिलाएं और प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में समानता, गुणवत्ता और सरलता को सुनिश्चित करें।

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