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महिलाओं के कारण सुरक्षित है धर्म : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत : भोपाल में आरएसएस द्वारा आयोजित ‘मातृशक्ति संवाद’ में नारी की निर्णायक भूमिका पर मंथन

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Jan 3, 2026

महिलाओं के कारण सुरक्षित है धर्म : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत

भोपाल में आरएसएस द्वारा आयोजित ‘मातृशक्ति संवाद’ में नारी की निर्णायक भूमिका पर मंथन

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से भोपाल स्थित शिवनेरी भवन में आयोजित ‘मातृशक्ति संवाद’ कार्यक्रम को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित किया। मंच पर मध्यभारत प्रांत संघचालक श्री अशोक पांडेय एवं भोपाल विभाग संघचालक श्री सोमकांत उमालकर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण विचारोत्तेजक रहा और “नारी तू ही नारायणी” के भाव को केंद्र में रखकर संवाद संपन्न हुआ

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सभ्य समाज की कल्पना महिलाओं के बिना संभव नहीं है। हमारा धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण ही सुरक्षित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का समय महिलाओं को सीमित रखने का नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने का है। परिवार और समाज दोनों को स्त्री–पुरुष मिलकर आगे बढ़ाते हैं, इसलिए दोनों का वैचारिक प्रबोधन आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल अवसर देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वैचारिक मजबूती और संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं। समाज में यह प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है, किंतु इसे और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

संवाद की कमी से उत्पन्न होती हैं सामाजिक चुनौतियां

लव जिहाद जैसे विषयों पर बोलते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि इसकी रोकथाम का पहला दायित्व परिवार का है। यह समझना होगा कि संवाद की कमी के कारण ही बेटियां गलत दिशा में बहक जाती हैं। परिवार में नियमित संवाद से धर्म, संस्कृति और परंपरा के प्रति स्वाभाविक जुड़ाव बनता है। उन्होंने इसके समाधान के लिए पारिवारिक संवाद, आत्मरक्षा के संस्कार और अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई पर बल दिया।

नारी सीमित नहीं, सशक्त है

डॉ. भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में नारी का स्थान मातृत्व के कारण अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने पश्चिमी अंधानुकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन से ही संस्कारों पर ध्यान देना आवश्यक है। भारतीय नारी ने हर युग में साहस और शक्ति का परिचय दिया है, रानी लक्ष्मीबाई जैसे उदाहरण आज भी प्रेरणास्रोत हैं।

कुटुंब व्यवस्था की धुरी है महिला

उन्होंने कहा कि कुटुंब व्यवस्था को संतुलित और सुदृढ़ बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है। परिवार में संवेदना, अनुशासन और समन्वय का दायित्व मुख्य रूप से महिला निभाती है। ‘स्व’ के भाव को परिवार से समाज और राष्ट्र तक पहुंचाने में मातृशक्ति की भूमिका निर्णायक है।

मानसिक स्वास्थ्य और जीवन दृष्टि

मानसिक तनाव और आत्महत्या जैसे विषयों पर बोलते हुए सरसंघचालक ने कहा कि परिवार में अपनापन और संवाद का अभाव व्यक्ति को अकेला बना देता है। बच्चों पर असंभव अपेक्षाएं थोपने के बजाय उनकी रुचि और क्षमता को समझना आवश्यक है। जीवन में केवल सफलता नहीं, बल्कि सार्थकता अधिक महत्वपूर्ण है।

मातृशक्ति से राष्ट्र निर्माण का आह्वान

डॉ. भागवत ने कहा कि भारत आज मानसिक दासता से बाहर निकल रहा है और विश्व भारत की ओर आशा से देख रहा है। देश की लगभग आधी आबादी महिलाएं हैं, इसलिए राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भूमिका अनिवार्य है। जहां नारी का सम्मान सुरक्षित होता है, वहां समाज स्वतः स्वस्थ रहता है—यही “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” का भावार्थ है।

कार्यक्रम का समापन समाज और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की निर्णायक भूमिका के संकल्प तथा वंदे मातरम् के साथ हुआ।

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