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सिर्फ आयु की तकनीकी सीमा के कारण कठोर आपराधिक श्रेणी में डालना : नाबालिग प्रेम प्रसंग वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रेमी युवक को दी राहत

Ashwani Kumar Sinha

Sun, Nov 2, 2025

नाबालिग प्रेम प्रसंग वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रेमी युवक को दी राहत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में अपनी विशेष संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए प्रेम के मामले में फंसे एक युवा जोड़े को राहत प्रदान की है। इस मामले में लड़की नाबालिग थी, जिसके चलते मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ और निचली अदालत ने युवक को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों, पक्षकारों के बयानों और वास्तविक परिस्थितियों का गहन परीक्षण करते हुए पाया कि यह आपराधिक अपराध की भावना वाला मामला नहीं था, बल्कि दोनों के बीच सहमति आधारित प्रेम संबंध था। न्यायालय ने कहा कि कानून का उद्देश्य बाल यौन शोषण से सुरक्षा है, लेकिन इसे ऐसे मामलों में कठोर सजा का औजार बनाना न्यायसंगत नहीं है, जहाँ दोनों पक्ष वास्तविक प्रेम संबंध में हों और लड़की अब वयस्क भी हो चुकी हो तथा स्वयं रिश्ते को स्वीकार कर रही हो।

शीर्ष अदालत ने युवक को सजा से राहत देते हुए उसे जेल से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त किया। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामले संवेदनशीलता से देखे जाने चाहिए, ताकि अनावश्यक दंडात्मकता युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद न कर दे।

यह आदेश भविष्य में उन मामलों के लिए भी एक मार्गदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रेम संबंधों को सिर्फ आयु की तकनीकी सीमा के कारण कठोर आपराधिक श्रेणी में डाल दिया जाता है।

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