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जब शर्तें ही लागू नहीं थीं, तो उनके उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 7 साल तक की सजा वाले गैर-जमानती मामलों में BNSS की धारा 480(3) की शर्तें लागू नहीं

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Apr 27, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 7 साल तक की सजा वाले गैर-जमानती मामलों में BNSS की धारा 480(3) की शर्तें लागू नहीं

नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026 — सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि ऐसे गैर-जमानती अपराध, जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष तक निर्धारित है, उनमें जमानत देते समय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 480(3) के तहत निर्धारित कठोर शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने यह फैसला मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया। मामले में आरोपी पर अवैध शराब रखने का आरोप था, जिसमें अधिकतम सजा तीन वर्ष निर्धारित है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने पहले आरोपी की जमानत इस आधार पर रद्द कर दी थी कि उसने धारा 480(3) के तहत लगाई गई शर्तों का उल्लंघन किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि जब संबंधित अपराध में सजा सात वर्ष से कम है, तो ऐसी शर्तें प्रारंभ से ही लागू नहीं होतीं।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि धारा 480(3) की शर्तें केवल उन्हीं गैर-जमानती अपराधों पर लागू होती हैं, जिनमें सजा सात वर्ष या उससे अधिक हो। चूंकि इस मामले में अधिकतम सजा तीन वर्ष थी, इसलिए ऐसी शर्तें लगाना विधिसम्मत नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब शर्तें ही लागू नहीं थीं, तो उनके उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता। इसी आधार पर कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए आरोपी की जमानत बहाल कर दी।

यह निर्णय जमानत से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है और निचली अदालतों के लिए स्पष्ट दिशा तय करता है।

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